हेल्थ डेस्क : बच्चों में जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड खाने की आदत को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली वैज्ञानिक रिसर्च सामने आई है। ‘यूनिवर्सिटी कॉलेज कॉर्क’ (UCC) के एपीसी (APC) माइक्रोबायोम रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों द्वारा की गई एक नई स्टडी के मुताबिक, जो बच्चे अपनी शुरुआती जिंदगी (बचपन) में नियमित रूप से ज्यादा फैट और ज्यादा शुगर वाले अनहेल्दी खाने का सेवन करते हैं, उनके दिमाग में हमेशा रहने वाले (स्थायी) बदलाव हो सकते हैं। यह असर इतना गहरा होता है कि बाद में डाइट में सुधार करने और शरीर का वजन सामान्य होने के बाद भी लंबे समय तक बना रहता है।

हाइपोथैलेमस को प्रभावित करती है अनहेल्दी डाइट
प्रसिद्ध साइंस जर्नल ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में प्रकाशित इस रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों ने एक प्रीक्लिनिकल माउस मॉडल (चूहों) का इस्तेमाल किया। स्टडी में पाया गया कि कम उम्र में हाई-फैट और हाई-शुगर डाइट मिलने से चूहों के बड़े होने पर भी उनके खाने के बिहेवियर (व्यवहार) में लगातार गड़बड़ी दिखी। वैज्ञानिकों ने इस दिमागी बदलाव को ‘हाइपोथैलेमस’ (Hypothalamus) की कार्यप्रणाली में आई खराबी से जोड़ा है। हाइपोथैलेमस दिमाग का वह मुख्य हिस्सा है जो इंसान की भूख, खाने की इच्छा और शरीर में एनर्जी बैलेंस को कंट्रोल करता है। लगातार प्रोसेस्ड फूड के संपर्क में रहने से कम उम्र में ही बच्चों की पसंद बदल जाती है, जिससे बड़े होने पर मोटापे का खतरा काफी बढ़ जाता है।

गट बैक्टीरिया और प्रीबायोटिक फाइबर से जगी उम्मीद
इस गंभीर समस्या के बीच वैज्ञानिकों ने एक राहत भरी उम्मीद भी जगाई है। स्टडी की मुख्य लेखिका डॉ. क्रिस्टीना क्यूस्टा-मार्टी के अनुसार, पेट के फायदेमंद गट माइक्रोबायोटा (गट बैक्टीरिया) को बदलकर इन दिमागी बदलावों के नुकसान को कम किया जा सकता है। रिसर्चर्स ने पाया कि एक विशेष फायदेमंद बैक्टीरियल स्ट्रेन ‘बिफीडोबैक्टीरियम लोंगम APC1472’ और प्रीबायोटिक फाइबर (FOS+GOS) का कॉम्बिनेशन हेल्दी खाने की आदतों को वापस लाने में मदद कर सकता है। यह प्रीबायोटिक फाइबर प्राकृतिक रूप से प्याज, लहसुन, केला, लीक और एस्पैरेगस जैसी चीजों में पाया जाता है, जो दिमागी रास्तों को दुरुस्त करने में टारगेटेड असर दिखाता है।

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