हेल्थ डेस्क : चिकित्सा और विज्ञान की दुनिया से एक बेहद क्रांतिकारी खबर सामने आई है। वैज्ञानिकों ने इंसानी सेल्स (कोशिकाओं) की सतह पर एक छिपा हुआ “शुगर कोड” खोजा है, जो भविष्य में बीमारियों का पता लगाने और उनके इलाज के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। ‘नेचर नैनोटेक्नोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक, मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर द साइंस ऑफ लाइट (MPL) के रिसर्चर्स ने ‘ग्लाइकन एटलसिंग’ (Glycan Atlasing) नाम की एक एडवांस्ड इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल करके इस सफलता को हासिल किया है।

क्या है ग्लाइकोकैलिक्स और ‘शुगर कोड’?
रिसर्चर्स के मुताबिक, हर इंसानी सेल शुगर (शर्करा) की एक पतली परत से ढकी होती है, जिसे ‘ग्लाइकोकैलिक्स’ कहते हैं। यह बाहरी कोटिंग कोशिकाओं को अपने आस-पास की चीज़ों के साथ इंटरैक्ट करने में मदद करती है। प्रोफ़ेसर लियोनहार्ड मॉकल की लीडरशिप में “फ़िज़िकल ग्लाइकोसाइंसेज़” रिसर्च ग्रुप ने कटिंग-एज सुपर रेज़ोल्यूशन माइक्रोस्कोपी के ज़रिए इस कोटिंग का एक विस्तृत मैप तैयार किया है। जांच में सामने आया कि ये कॉम्प्लेक्स शुगर मॉलिक्यूल लगातार बदलते रहते हैं और सेल की अंदरूनी हालत के आधार पर अपना मॉलिक्यूलर अरेंजमेंट (पैटर्न) बदलते हैं। यह लगभग एक डिस्प्ले स्क्रीन की तरह है, जो सेल के अंदर क्या चल रहा है, उसकी जानकारी सतह पर दिखाती है।

कैंसर और इम्यून रिस्पॉन्स की होगी सटीक पहचान
इस रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि ये नैनोस्केल शुगर पैटर्न अलग-अलग सेलुलर स्टेट के बीच आसानी से फर्क कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने इसके ज़रिए कैंसर डेवलपमेंट के अलग-अलग चरणों की पहचान की, एक्टिवेटेड और इनएक्टिव इम्यून सेल्स के बीच अंतर खोजा, और ह्यूमन ब्रेस्ट टिशू में कैंसर वाले हिस्सों को हेल्दी हिस्सों से अलग करने में सफलता पाई। स्टडी के लेखक प्रो. मॉकल ने बताया कि यह तकनीक भविष्य के डायग्नोस्टिक तरीकों के लिए एक उम्मीद जगाने वाला आधार है। अब टीम इस प्रोसेस को और ज़्यादा ऑटोमेट करने की योजना बना रही है ताकि इसे जल्द ही रेगुलर मेडिकल इस्तेमाल में लाया जा सके।

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