गुजरात की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। वन विभाग के कर्मचारियों पर हमला करने और जबरन वसूली के मामले में दोषी करार दिए गए आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता चैतर वसावा की विधानसभा सदस्यता को तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। गुजरात विधानसभा के उपाध्यक्ष ने इस बात की आधिकारिक जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत के इस बड़े फैसले के बाद नियमों के तहत चैतर वसावा अब विधायक नहीं रहे हैं और उनकी डेडियापाडा विधानसभा सीट को तत्काल प्रभाव से खाली मान लिया गया है।

अदालत की सजा और कानून का चला डंडा
इससे पहले मंगलवार को ही गुजरात के नर्मदा जिले की राजपीपला सत्र अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए डेडियापाडा से ‘आप’ विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा और सात अन्य आरोपियों को वन अधिकारियों पर हमले, डराने-धमकाने और रंगदारी के मामले में दोषी ठहराया था। कोर्ट ने इन सभी को सात-सात साल के कड़े कारावास की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट के कड़े नियमों के अनुसार, यदि किसी भी मौजूदा जनप्रतिनिधि को 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो उनकी सदस्यता स्वतः ही रद्द हो जाती है। इसी कानून के तहत विधानसभा सचिवालय ने यह त्वरित कदम उठाया है।

‘आप’ के लिए गुजरात में बहुत बड़ा सियासी संकट
चैतर वसावा की सदस्यता जाना गुजरात में आम आदमी पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक और राजनीतिक नुकसान है। वसावा आदिवासी बेल्ट में ‘आप’ के सबसे मजबूत और लोकप्रिय चेहरों में से एक माने जाते हैं। डिप्टी स्पीकर की इस घोषणा के बाद अब डेडियापाडा सीट पर आने वाले समय में उपचुनाव होना तय हो गया है। हालांकि, वसावा की लीगल टीम इस फैसले के खिलाफ तुरंत गुजरात हाईकोर्ट का रुख कर रही है, जहां वे सजा पर ‘स्टे’ लगाने की मांग करेंगे। अगर हाईकोर्ट से इस सजा पर रोक लगती है, तभी उनकी सदस्यता बहाल होने की कोई उम्मीद बचेगी।

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