गुजरात के नर्मदा जिले की डेडियापाडा विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के दिग्गज और फायरब्रांड विधायक चैतर वसावा की मुश्किलें सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं। राजपीपला सेशंस कोर्ट ने वन विभाग के कर्मचारियों पर हमला करने, डराने-धमकाने और सरकारी काम में बाधा डालने के एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी और अन्य सह-आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने विधायक और उनकी पत्नी पर 96,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले के बाद से ही गुजरात के सियासी गलियारों में भारी खलबली मच गई है।
क्या था वन कर्मियों से विवाद और हवाई फायरिंग का मामला?
यह पूरा विवाद कुछ समय पहले तब शुरू हुआ था, जब वन विभाग के कर्मचारी डेडियापाडा इलाके में अपनी सरकारी ड्यूटी पर तैनात थे। आरोप है कि विधायक के आवास के पास किसी बात को लेकर वन कर्मियों के साथ चैतर वसावा और उनके समर्थकों की तीखी बहस हो गई, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। वसावा और उनके साथियों पर फॉरेस्ट स्टाफ के साथ बेरहमी से मारपीट करने, सरकारी काम रोकने और वन कर्मियों को डराने के लिए हवा में कथित तौर पर गोलीबारी करने जैसे कई संगीन आरोप लगे थे। इस मामले में वसावा को पहले एक लंबा समय जेल में भी बिताना पड़ा था, जिसके बाद उन्हें बेल मिली थी। लेकिन अब कोर्ट ने सभी गवाहों और पुख्ता सबूतों के आधार पर उन्हें दोषी माना है।
विधायकी पर मंडराया संकट, हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी लीगल टीम
सुप्रीम कोर्ट के सख्त नियमों और लिली थॉमस मामले के ऐतिहासिक फैसले के मुताबिक, यदि किसी भी मौजूदा सांसद या विधायक को अदालत द्वारा 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो उनकी सदन की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द हो जाती है। चूंकि चैतर वसावा को 7 साल की सजा मिली है, इसलिए कानूनन उनकी विधायकी जाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, अपनी सदस्यता बचाने और जेल जाने से बचने के लिए वसावा की लीगल टीम तुरंत एक्टिव हो गई है। उनके वकील इस फैसले के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि सजा पर ‘स्टे’ (रोक) लगवाई जा सके। यदि हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो आम आदमी पार्टी के लिए गुजरात में यह एक बहुत बड़ा झटका होगा।



