उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से इंसानी क्रूरता और बंधुआ मजदूरी का एक ऐसा खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन और मानवाधिकार गलियारों को हिलाकर रख दिया है। जिले की एक दोना बनाने वाली फैक्ट्री में सालों से बंधक बनाकर रखे गए एक दर्जन (12) मजदूरों को पुलिस ने बेहद खराब स्थिति में मुक्त कराया है। फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान पर इन मजदूरों को सालों तक कैद में रखने, बेरहमी से पीटने और भूखा रखने के बेहद गंभीर व अमानवीय आरोप लगे हैं। मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय वर्मा ने इस पूरे सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए हैं।

12 हजार का लालच देकर लाए, 24 घंटे में सिर्फ एक बार खाना और बंद कमरा
पुलिस जांच और मेडिकल परीक्षण में मजदूरों के साथ हुए अमानवीय व्यवहार की पूरी तरह से पुष्टि हुई है। मुक्त कराए गए कई मजदूरों के शरीर पर लोहे की रॉड और बेल्ट से दी गई यातनाओं और चोटों के गहरे निशान मिले हैं। पीड़ितों ने बताया कि उन्हें हर महीने 12,000 रुपये वेतन का लालच देकर देश के अलग-अलग हिस्सों से यहां लाया गया था। लेकिन यहां आते ही उन्हें बंधक बना लिया गया। फैक्ट्री में दिन-रात काम कराने के बाद सभी मजदूरों को एक छोटे से बंद अंधेरे कमरे में ताले के अंदर रखा जाता था। हद तो यह है कि आरोपियों द्वारा इन मजदूरों को 24 घंटे में केवल एक बार ही खाना दिया जाता था।

यातना के कारण 3 मजदूरों की मौत का संगीन आरोप, एक की हुई पहचान
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला और गंभीर मोड़ तब आया जब जांच के दौरान यह आरोप लगा कि फैक्ट्री के अंदर दी जाने वाली बर्बर यातनाओं और भुखमरी के कारण अब तक तीन मजदूरों की तड़प-तड़प कर मौत हो चुकी है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मृतकों में से एक मजदूर की पहचान सुनिश्चित कर ली है, जबकि अन्य दो के विषय में जानकारी जुटाई जा रही है। एसएसपी संजय वर्मा ने बताया कि मुख्य आरोपी अंकित बालियान और उसके सहयोगियों के खिलाफ बंधुआ श्रम पद्धति अधिनियम, अवैध रूप से बंधक बनाने और गैर-इरादतन हत्या सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

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