उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में तनाव और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम देखने को मिल रहे हैं। यूजीसी (UGC) रोलबैक की मांग को लेकर किसानों द्वारा आहूत ट्रैक्टर मार्च और जिला मुख्यालय के घेराव के ऐलान के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। प्रशासन के पास इनपुट था कि इस आंदोलन में लगभग 5 हजार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और 50 हजार लोगों के जुटने का दावा किया गया था, जिसके मद्देनजर पूरे जिले को एक छावनी में तब्दील कर दिया गया है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एत्मादपुर, कुबेरपुर और रामबाग समेत कई प्रमुख रास्तों पर भारी बैरिकेडिंग की गई है।
आगरा
➡️UGC रोलबैक की मांग पर ट्रैक्टर मार्च
➡️जिला मुख्यालय घेराव का ऐलान है
➡️ट्रैक्टर मार्च से पहले प्रशासन सख्त
➡️जिला मुख्यालय पर भारी फोर्स तैनात
➡️कई किसान नेता हाउस अरेस्ट किए गए
➡️सभी एंट्री पॉइंट्स पर पुलिस-पीएसी का पहरा
➡️राजस्थान,मध्य प्रदेश बॉर्डर सील किए गए
➡️जिले को… pic.twitter.com/SLRNROG6Oq— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) September 18, 2026
जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कई प्रमुख किसान नेताओं को उनके घरों में ही हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर दिया है। शहर और कलेक्ट्रेट के सभी एंट्री पॉइंट्स पर पुलिस और पीएसी के जवानों का कड़ा पहरा बैठा दिया गया है। इसके साथ ही राजस्थान और मध्य प्रदेश से लगने वाले सभी डिस्ट्रिक्ट बॉर्डर्स को पूरी तरह सील कर दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है और पूरे जिले में धारा 144 लागू कर दी गई है। बिना गहन जांच और पूछताछ के किसी भी वाहन को शहर के अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि शहर की शांति व्यवस्था और कानून से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी लगातार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके। भारी पुलिस बल की तैनाती और शहर की सीमाओं पर कड़े पहरे के कारण आम जनजीवन और यातायात पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है, और लोग प्रशासनिक निर्देशों का पालन करते हुए नजर आ रहे हैं।



