GST लागू होने के करीब 9 साल बाद टैक्स सिस्टम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार GST अधिकारियों को मिली गिरफ्तारी की शक्ति हटाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव पर 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में चर्चा हो सकती है।

अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो GST से जुड़े मामलों में टैक्स अधिकारियों के पास सीधे गिरफ्तारी करने की मौजूदा शक्ति खत्म हो सकती है। इसके लिए GST कानून में संशोधन करना होगा और सरकार इसे आगामी शीतकालीन सत्र में संसद के सामने ला सकती है।

अभी GST अधिकारियों के पास क्या अधिकार हैं?

मौजूदा GST कानून के तहत गंभीर टैक्स अपराधों के मामलों में गिरफ्तारी का प्रावधान है। खासकर फर्जी बिल बनाना, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना और जानबूझकर टैक्स चोरी जैसे मामलों में कार्रवाई हो सकती है।

CGST Act की धारा 69 के तहत कमिश्नर को गिरफ्तारी की मंजूरी देने का अधिकार है। इसके लिए अधिकारी के पास यह मानने का पर्याप्त आधार होना चाहिए कि व्यक्ति ने गंभीर GST अपराध किया है।

सरकार ने 2022 में गिरफ्तारी और जमानत को लेकर अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि सिर्फ इसलिए गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए क्योंकि कानून में इसकी अनुमति है। गिरफ्तारी के लिए मामले की गंभीरता और व्यक्ति की भूमिका समेत दूसरे पहलुओं को देखना जरूरी है।

अब क्यों हो रहा बदलाव पर विचार?

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह टैक्स अधिकारियों के अधिकारों के गलत इस्तेमाल की शिकायतें बताई जा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारों के बीच पिछले करीब 8-9 महीनों से इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है।

कारोबारियों और कंपनियों की तरफ से GST जांच और गिरफ्तारी को लेकर चिंताएं जताई जाती रही हैं। खासकर कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी को लेकर उद्योग जगत में सवाल उठते रहे हैं।

सरकार अब GST सिस्टम में ऐसा बदलाव चाहती है जिससे गंभीर धोखाधड़ी पर कार्रवाई भी बनी रहे और सामान्य कारोबारियों को अनावश्यक डर का सामना न करना पड़े।

4 साल में 887 गिरफ्तारियां हुईं

आंकड़ों से पता चलता है कि GST कानून के तहत गिरफ्तारी का इस्तेमाल हुआ है। 2021-22 से 2024-25 के बीच 72,393 GST अपराध के मामले दर्ज हुए और केंद्रीय GST अधिकारियों ने 887 लोगों को गिरफ्तार किया।

यह आंकड़ा सिर्फ केंद्रीय GST फॉर्मेशन का है। राज्य GST अधिकारियों की गिरफ्तारियां इसमें शामिल नहीं हैं।

फ्रॉड करने वालों पर कार्रवाई कैसे होगी?

प्रस्तावित बदलाव में गंभीर धोखाधड़ी और जानबूझकर किए गए अपराधों पर कार्रवाई जारी रखने की बात है। फर्क यह हो सकता है कि GST कानून के तहत टैक्स अधिकारी खुद गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल न करें।

ऐसे मामलों में सामान्य आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता अपनाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक जानबूझकर किए गए गंभीर फ्रॉड और धोखाधड़ी के मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक पर नजर

अब सबकी नजर 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक पर है। इसी बैठक में गिरफ्तारी की शक्ति हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है।

अगर परिषद से प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो GST कानून में संशोधन की जरूरत होगी। इसके बाद सरकार इसे संसद में ला सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक आगामी शीतकालीन सत्र में कानून में बदलाव किया जा सकता है।

हालांकि, अभी GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म नहीं हुई है। फिलहाल यह एक प्रस्ताव है और अंतिम फैसला GST काउंसिल की चर्चा, सरकार के फैसले और आगे होने वाली कानूनी प्रक्रिया के बाद ही साफ होगा।

'धनराज के राज और IAS अफसर जिंदाबाद' । पॉवर सेंटर WITH VIRENDRA SINGH ।

शेयर करना
Exit mobile version