देश के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और गरिमा को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद मंगलवार, 11 अगस्त को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘वंदे मातरम् बिल’ (राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026) को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह विधेयक अब देश में एक कड़ा कानून बन चुका है।

इस नए कानून के लागू होने के बाद अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को जानबूझकर गाने से रोकना, उसका अपमान करना या उसे गाते समय किसी सभा या आयोजन में बाधा डालना एक दंडनीय अपराध माना जाएगा। अब तक राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ को ही राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम के तहत विशेष कानूनी सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन इस संशोधन के जरिए अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रीय गान के बिल्कुल बराबर का कानूनी दर्जा मिल गया है।

पुराने नियमों के तहत, राष्ट्रीय गान का अपमान करने या उसमें बाधा डालने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। अब यही सख्त प्रावधान राष्ट्रीय गीत पर भी लागू होंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर लाल किले की प्राचीर से पहली बार आधिकारिक रूप से ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा।

गौरतलब है कि इसी साल की शुरुआत में गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत के गायन को लेकर एक नया प्रोटोकॉल भी जारी किया था, जिसके तहत आधिकारिक कार्यक्रमों और स्कूलों में इसके छह पदों को गाना अनिवार्य किया गया है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले इस गीत को उसका सर्वोच्च सम्मान दिलाना और इसके प्रति किसी भी तरह की अवहेलना को रोकना है।

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