उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक गेमिंग जोन और कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड की जांच आखिरकार पूरी हो गई है। इस दर्दनाक हादसे की तह तक जाने के लिए गठित की गई दो सदस्यीय विशेष जांच दल ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एसआईटी ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित विभागों के नामों की सूची शासन को भेज दी है, जिसके बाद बड़े स्तर पर निलंबन और कानूनी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

15 युवाओं की मौत के बाद गठित हुई थी एसआईटी
गौरतलब है कि बीते 22 जून को अलीगंज के इस गेमिंग जोन में लगी भयानक आग की चपेट में आने से 15 मासूम युवाओं की असमय मौत हो गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए थे। इस जांच की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी जोन लखनऊ प्रवीण कुमार को सौंपी गई थी। एसआईटी की टीम ने दो से तीन बार घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया, साक्ष्य जुटाए और तब जाकर यह अंतिम रिपोर्ट तैयार की है।

स्वीकृत लोड से कहीं ज्यादा बिजली का हो रहा था इस्तेमाल, एलडीए भी कटघरे में
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में घटनास्थल से मिले वैज्ञानिक साक्ष्यों, फोरेंसिक जांच के नतीजों और संबंधित सरकारी विभागों से मिली फाइलों का गहराई से अध्ययन किया है। इस जांच में सबसे बड़ी लापरवाही विद्युत सुरक्षा निदेशालय और लखनऊ विकास प्राधिकरण की सामने आई है।

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उस इमारत के लिए केवल 20 किलोवाट का विद्युत भार स्वीकृत किया गया था, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर वहां 35 किलोवाट से भी ज्यादा का लोड इस्तेमाल किया जा रहा था। भारी ओवरलोडिंग के बावजूद विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने आंखें मूंदे रखीं, जो अंततः इस बड़े हादसे का कारण बना। इसके अलावा, एलडीए के कई सेवानिवृत्त और वर्तमान अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिन्होंने बिना पुख्ता सुरक्षा मानकों के इस गेमिंग जोन और कोचिंग सेंटर को व्यावसायिक संचालन की अनुमति दी थी। एसआईटी ने इन सभी दोषियों के खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है।

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