भारतीय खेल जगत और सियासत को हिलाकर रख देने वाले महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले में एक बड़ा मोड़ आ गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ प्रमुख और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ चल रहे इस आपराधिक मामले में आगामी 3 अगस्त को अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना सकती है। इस संभावित फैसले पर न केवल देश के शीर्ष पहलवानों की, बल्कि खेल प्रेमियों और राजनीतिक गलियारों की भी नजरें टिकी हुई हैं।
छह महिला पहलवानों की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला
यह पूरा कानूनी विवाद देश की छह प्रतिष्ठित महिला पहलवानों द्वारा बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न, अनुचित व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के बाद शुरू हुआ था। इस हाई-प्रोफाइल मामले में दिल्ली पुलिस ने गहन जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरते हुए मई 2024 में अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के तहत बाकायदा आरोप तय करने का आदेश दिया था। हालांकि, कानूनी तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने छह शिकायतकर्ताओं में से एक महिला पहलवान द्वारा लगाए गए आरोपों में बृजभूषण शरण सिंह को पहले ही आरोपमुक्त कर दिया था।
सह-आरोपी विनोद तोमर के भाग्य का भी होगा फैसला
अदालत केवल बृजभूषण शरण सिंह ही नहीं, बल्कि इस मामले में सह-आरोपी रहे भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ भी अपना फैसला सुनाएगी। मई 2024 के अदालती आदेश में विनोद तोमर के खिलाफ भी आपराधिक साजिश और उकसाने से जुड़ी संबंधित धाराओं में आरोप तय किए गए थे।
इस संवेदनशील मामले को लेकर पिछले लंबे समय से दोनों पक्षों के वकीलों के बीच राउज एवेन्यू कोर्ट में तीखी बहस और गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही थी। अब जब अदालत ने अपनी सुनवाई के बाद फैसले की संभावित तारीख 3 अगस्त तय की है, तो यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि देश के कानून का रुख इस ऐतिहासिक खेल-विवाद पर क्या रहता है।



