भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी को एक नया आयाम मिला है। अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भविष्य के लड़ाकू विमानों के लिए F414 जेट इंजन के सह-उत्पादन (Co-production) से जुड़े तकनीकी मुद्दों पर आपसी सहमति बना ली है।
करीब तीन साल से चल रही बातचीत के बाद यह समझौता भारत के एडवांस्ड फाइटर जेट प्रोग्राम जैसे AMCA और LCA Mk2 के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस कदम से भारत की “मेक इन इंडिया” डिफेंस टेक्नोलॉजी को बड़ी मजबूती मिलेगी और देश में ही उन्नत जेट इंजन निर्माण का रास्ता और साफ होगा।
इसी के साथ GE एयरोस्पेस ने भारतीय वायु सेना (IAF) के साथ एक और अहम समझौता किया है। इसके तहत LCA तेजस में इस्तेमाल होने वाले F404-IN20 इंजनों के लिए भारत में ही डोमेस्टिक डिपो स्थापित किया जाएगा। इस सुविधा का संचालन वायु सेना करेगी, जबकि GE तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराएगी।
इस फैसले से न केवल जेट इंजनों की मरम्मत और रखरखाव देश में ही संभव होगा, बल्कि विदेशी निर्भरता भी कम होगी और वायुसेना के फाइटर जेट्स की उपलब्धता में भी सुधार आएगा।
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