उत्तराखंड में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नगरासू क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर निहंगों के कब्जे के बाद से उपजा तनाव अब और गहरा गया है। इस विवाद और सुरक्षा चिंताओं का सीधा असर अब क्षेत्र की कानून-व्यवस्था के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। मुख्य मार्ग पर व्याप्त इस तनाव के कारण बदरीनाथ और केदारनाथ जाने वाले चारधाम यात्री इस इलाके में रुकने से कतरा रहे हैं, जिससे स्थानीय होटल, ढाबों और दुकानों का कारोबार पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।
यात्रियों की बेरुखी से 50 से अधिक प्रतिष्ठान प्रभावित
स्थानीय निवासी गौरव चौधरी और व्यापारियों के मुताबिक, नगरासू में बने माहौल के चलते तीर्थयात्री यहां गाड़ियां रोकने से बच रहे हैं। क्षेत्र के करीब 50 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों में सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थिति की संवेदनशीलता और सुरक्षा कारणों को देखते हुए कई होटल संचालकों ने एहतियातन अपने प्रतिष्ठानों पर ताला लगा दिया है। स्थानीय व्यापारी अमित सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य सतीश राणा और हरीश नेगी ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से मांग की है कि इस विवाद का जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाए, ताकि क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल हो सके।
श्रद्धालु नहीं पहुंचे तो खराब हो रहा गुरुद्वारे का लंगर
इस विवाद की मार केवल व्यापार पर ही नहीं, बल्कि गुरुद्वारे की सेवा और परंपराओं पर भी पड़ी है। गुरुद्वारे के सेवादार पमेन्द्र सिंह ने बताया कि पहले बड़ी संख्या में चारधाम यात्री और श्रद्धालु यहां रुककर लंगर ग्रहण करते थे। लेकिन इस गतिरोध के बाद से श्रद्धालुओं का आना लगभग बंद हो गया है, जिसके कारण प्रतिदिन श्रद्धा भाव से तैयार किया जा रहा भोजन खराब हो रहा है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने जिला प्रशासन और पुलिस से मामले में त्वरित हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि यात्रा सुचारु रूप से चल सके और स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित न हो।



