बिहार : भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर पुलिस इस कार्रवाई को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर मृतक के परिजन इसे सुनियोजित हत्या करार दे रहे हैं। भरत की मां आशा देवी ने पुलिस और एसटीएफ पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

आशा देवी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब आठ बजे पुलिस और एसटीएफ की टीम उनके घर पहुंची थी। उनका आरोप है कि जवानों ने जबरन घर का दरवाजा खुलवाया और परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने परिवार को धमकाया और कहा कि यदि भरत सामने नहीं आया तो पूरे परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

मृतक की मां ने कहा – बेटे को जानबूझकर निशाना बनाया गया

मृतक की मां का कहना है कि उनके बेटे को जानबूझकर निशाना बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि गोली लगने के बाद भी पुलिस और एसटीएफ के जवानों ने भरत के साथ मारपीट की। आशा देवी ने यह भी कहा कि भरत मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ था और पुलिस द्वारा उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जाने का दावा गलत है।

भरत बीएससी अंतिम वर्ष का छात्र था

परिजनों के मुताबिक, भरत भूषण तिवारी गांव में बाढ़ और मिट्टी कटाव की समस्या को लेकर लगातार आवाज उठा रहा था। गांव के पास बने जल निकासी मार्ग के कारण हो रहे कटाव को रोकने के लिए वह पिछले एक महीने से प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर रहा था और मिट्टी भराई की मांग कर रहा था। परिवार का कहना है कि भरत बीएससी अंतिम वर्ष का छात्र था और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। वहीं पुलिस का पक्ष इससे बिल्कुल अलग है। पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर से हुई, जिसमें भरत तिवारी कथित रूप से अवैध पिस्टल के साथ दिखाई दे रहा था। इस संबंध में मिली शिकायत के बाद शाहपुर थाना पुलिस को जांच और कार्रवाई का निर्देश दिया गया था।

पुलिस का दावा है कि मंगलवार को पुलिस टीम भरत के घर पहुंची थी और उसे समझाने तथा हथियार जब्त करने का प्रयास किया गया था। हालांकि उसने सहयोग नहीं किया और कथित तौर पर पुलिसकर्मियों को धमकाते हुए अधिकारी पर पिस्टल तान दी। पुलिस का कहना है कि तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद उस समय बल प्रयोग नहीं किया गया।

लाइव प्रसारण के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग भी की

पुलिस के मुताबिक, बुधवार को भरत फेसबुक लाइव पर आया और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। आरोप है कि उसने लाइव प्रसारण के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग भी की। इसके बाद वह घर से निकलकर खेतों की ओर चला गया और लगातार पुलिस को चुनौती देता रहा। अधिकारियों ने कई बार उसे आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन उसने इनकार कर दिया। पुलिस का कहना है कि आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी के दोनों पैरों की जांघों में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे पहले आरा सदर अस्पताल और बाद में बेहतर इलाज के लिए पटना पीएमसीएच भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

घटना के बाद बिलौटी गांव में तनाव का माहौल है। परिजन जहां इसे हत्या बता रहे हैं, वहीं पुलिस अपनी कार्रवाई को कानूनसम्मत और आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बता रही है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

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