Nobel Peace Prize 2026: नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा में अब कुछ ही दिन बाकी हैं और इस बार संभावित नामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी तक कई चर्चित नामों का जिक्र हो रहा है। लेकिन सबसे दिलचस्प नामों में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) भी शामिल है।
इस साल नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कुल 287 उम्मीदवारों के नामांकन दर्ज किए गए हैं। इनमें 208 व्यक्ति और 79 संगठन शामिल हैं। हालांकि, नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी मौजूदा नामांकित उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं करती। नामांकन से जुड़ी जानकारी 50 साल तक गोपनीय रहती है।
नोबेल शांति पुरस्कार 2026 के विजेता की घोषणा 9 अक्टूबर 2026 को ओस्लो में की जाएगी। नॉर्वेजियन नोबेल इंस्टीट्यूट के मुताबिक घोषणा स्थानीय समयानुसार सुबह 11 बजे होगी।
2026 में कितने नामांकन मिले?
नोबेल कमेटी को इस साल 287 उम्मीदवारों के नामांकन मिले हैं। इनमें 208 व्यक्ति और 79 संगठन हैं। नामांकन की संख्या हर साल काफी अधिक रहती है और किसी व्यक्ति या संगठन का नाम सामने आना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह अंतिम सूची में है या उसे पुरस्कार मिलेगा।
नोबेल कमेटी शांति, संघर्ष समाधान, संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े प्रयासों का मूल्यांकन करती है। अंतिम फैसला नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी करती है।
सबसे चौंकाने वाला नाम- International Space Station
इस साल संभावित नामों की चर्चा में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का नाम सबसे अलग है। पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो (PRIO) के कार्यवाहक निदेशक हाकॉन गेरलॉव की अपडेटेड सूची में ISS को शामिल किया गया है।
ISS को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका और रूस जैसे भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी देशों के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों ने लंबे समय तक इस साझा परियोजना पर काम किया है।
PRIO के मुताबिक, ISS साझेदारी ने दिखाया कि पृथ्वी पर राजनीतिक संबंध तनावपूर्ण होने के बावजूद वैज्ञानिक और शांतिपूर्ण सहयोग जारी रखा जा सकता है। स्टेशन को 2030 के दशक की शुरुआत में सेवा से बाहर किए जाने की योजना है।
डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी चर्चा में
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा जाहिर करते रहे हैं। इस साल भी उनके नामांकन की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, नोबेल कमेटी आधिकारिक तौर पर किसी नामांकन की पुष्टि या खंडन नहीं करती।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों ने इस साल ट्रंप के पुरस्कार जीतने की संभावनाओं को कम आंका है और उनके नाम के साथ ईरान से जुड़ा मौजूदा संघर्ष भी चर्चा में है।
2025 में नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली मारिया कोरीना मचाडो द्वारा अपना स्वर्ण पदक ट्रंप को दिए जाने की घटना ने भी इस साल की चर्चाओं को प्रभावित किया है।
मार्क कार्नी का नाम भी संभावित दावेदारों में
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का नाम भी 2026 के संभावित दावेदारों की चर्चाओं में है। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों के बीच कनाडा के रुख और कार्नी की अंतरराष्ट्रीय सक्रियता के कारण उनका नाम वैश्विक चर्चा में आया है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मीडिया में किसी व्यक्ति का संभावित दावेदार के तौर पर नाम आना नोबेल कमेटी की आधिकारिक शॉर्टलिस्ट की पुष्टि नहीं है।
पोप लियो क्यों हैं चर्चा में?
पोप लियो का नाम भी संभावित दावेदारों की चर्चा में आया है। युद्ध और शांति के मुद्दों पर उनके सार्वजनिक बयानों तथा बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर को उनके नाम के साथ जोड़ा जा रहा है।
रॉयटर्स के मुताबिक, संभावित नामों की चर्चाओं में पोप लियो का नाम भी शामिल है।
फ्रांसेस्का अल्बानीज का नाम भी सामने आया
संयुक्त राष्ट्र की अधिकृत क्षेत्र यानी ऑक्यूपाइड फिलिस्तीनी टेरिटरीज पर विशेष रिपोर्टर फ्रांसेस्का अल्बानीज भी संभावित नामों में शामिल हैं। उन्होंने गाजा में इजराइल के सैन्य अभियान और वेस्ट बैंक से जुड़े मुद्दों पर अपनी रिपोर्टों और बयानों के जरिए अंतरराष्ट्रीय कानून तथा मानवाधिकारों पर जोर दिया है।
उनके नाम की चर्चा गाजा युद्ध और अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर चल रही व्यापक बहस के संदर्भ में हुई है।
ICJ और ICC भी संभावित नामों में
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) भी संभावित नामों की चर्चा में हैं। PRIO की 2026 की सूची में दोनों न्यायिक संस्थाओं को शामिल किया गया है।
ICJ देशों के बीच कानूनी विवादों और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े मामलों पर काम करता है, जबकि ICC व्यक्तियों के खिलाफ नरसंहार, युद्ध अपराध और अन्य गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई करता है।
इन संस्थाओं को लेकर चर्चा का एक आधार यह है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और जवाबदेही को मजबूत करने में उनकी भूमिका को शांति से जोड़ा जाता है।
यूक्रेन के बच्चों के लिए काम करने वाले मायकोला कुलेबा
PRIO की सूची में मायकोला कुलेबा और Save the Children का नाम भी शामिल है। कुलेबा ने 2014 में Save Ukraine की स्थापना की थी। उनका काम युद्ध के कारण प्रभावित यूक्रेनी बच्चों और विस्थापित परिवारों की मदद से जुड़ा रहा है।
Save the Children भी संघर्ष प्रभावित इलाकों में बच्चों की सुरक्षा और सहायता से जुड़े काम करता है।
सूडान की Emergency Response Rooms
सूडान में 2023 से जारी संघर्ष के बीच स्थानीय नागरिकों ने Emergency Response Rooms बनाए हैं। ये नेटवर्क सामुदायिक रसोई, चिकित्सा सहायता, सुरक्षित निकासी और जरूरी सेवाओं को बनाए रखने जैसे काम करते हैं।
PRIO ने भी इन्हें 2026 के संभावित नामों में शामिल किया है।
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए CPJ
Committee to Protect Journalists (CPJ) भी संभावित नामों में शामिल है। यह संगठन संघर्ष और संकट वाले क्षेत्रों में पत्रकारों की सुरक्षा, पत्रकारों पर हमलों और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों पर काम करता है।
PRIO की अपडेटेड सूची में CPJ को भी शामिल किया गया है।
महिलाओं के नामों पर भी नजर
नोबेल शांति पुरस्कार के इतिहास में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में कम रही है। ऐसे में इस साल संभावित महिला नामों को लेकर भी चर्चा है।
मीडिया रिपोर्टों में गाजा में काम करने वाली सर्जन सारा अल-सक्का और रूसी विपक्षी नेता अलेक्सी नवलनी की पत्नी यूलिया नवलनाया के नामों का भी जिक्र हुआ है।
दुनिया में बढ़ते संघर्षों के बीच होगा फैसला
2026 का नोबेल शांति पुरस्कार ऐसे समय में दिया जा रहा है जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और मानवीय संकट जारी हैं। सूडान, यूक्रेन और मध्य पूर्व समेत कई क्षेत्रों में जारी तनाव के बीच इस पुरस्कार के संभावित दावेदारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ी है।
इस बार की संभावित सूची में जहां वैश्विक नेता और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाएं शामिल हैं, वहीं बच्चों की सुरक्षा, पत्रकारों की स्वतंत्रता, मानवीय राहत और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग से जुड़े संगठन व संस्थाएं भी चर्चा में हैं।
9 अक्टूबर को होगा अंतिम फैसला
नॉर्वेजियन नोबेल इंस्टीट्यूट के अनुसार 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा 9 अक्टूबर को सुबह 11 बजे ओस्लो में होगी। आधिकारिक घोषणा तक किसी भी संभावित नाम को विजेता मानना सही नहीं होगा।
नोबेल कमेटी की मौजूदा नामांकित उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक नहीं होती और नामांकन संबंधी जानकारी 50 साल तक गोपनीय रहती है। इसलिए अभी सामने आ रहे नामों को संभावित दावेदार या विशेषज्ञों की चर्चाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।



