डेस्क : अमेरिका के टेनेसी राज्य से एक बेहद हैरान और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मृत्युदंड की सजा के तहत एक महिला कैदी को घातक इंजेक्शन (Lethal Injection) दिए जाने के बावजूद उसकी सांसें चलती रहीं और प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। मीडिया गवाहों के अनुसार, महिला को दवा की दो खुराकें दी जा चुकी थीं, इसके बावजूद उसके जीवित रहने से जेल प्रशासन और कानूनी हलकों में हड़कंप मच गया है। इस महिला कैदी की पहचान क्रिस्टा गेल पाइक (Christa Gail Pike) के रूप में हुई है, जिसे साल 1995 में अपने एक सहपाठी की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था।
मौत की सजा का इंजेक्शन देने के बाद भी जीवित रही महिला
अमेरिका के टेनेसी में क्रिस्टा गेल पाइक को घातक इंजेक्शन से मृत्युदंड देने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। मीडिया गवाहों के मुताबिक, दवा की दो खुराक दिए जाने के बाद भी उसकी सांसें चलती रहीं। पाइक 1995 में सहपाठी की हत्या की… pic.twitter.com/6H6YPtWyoW
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) October 1, 2026
इस घटना के सामने आने के बाद महिला के वकीलों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के दौरान कैदी को अनावश्यक शारीरिक पीड़ा और यातना से गुजरना पड़ा है। वकीलों ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और सजा की इस प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। उनका तर्क है कि इस तरह की विफलताएं मानवीय गरिमा के खिलाफ हैं और कैदी के अधिकारों का हनन करती हैं।
यह पूरा मामला अमेरिका में मृत्युदंड देने के तरीकों और उनकी प्रभावशीलता को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गया है। मानवाधिकार संगठन और वकीलों की टीमें इस तरह की मेडिकल और प्रशासनिक त्रुटियों पर लगातार सवाल उठा रही हैं। फिलहाल, अदालत के अगले रुख और इस हाई-प्रोफाइल मामले में आने वाले कानूनी फैसलों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।



