अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में देश का दबदबा और नेतृत्व पक्का करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। ट्रंप ने ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ (SIF) नाम से एक नई फेडरल टास्क फोर्स बनाने की बड़ी घोषणा की है। यह नया कदम एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर आधारित है, जिसके तहत अमेरिकी सरकार के सभी ऑपरेशन्स में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ और ‘AI’ शब्दों को बदलकर अब आधिकारिक तौर पर ‘सुपर इंटेलिजेंस’ और ‘SI’ कर दिया गया है।
ट्रुथ सोशल पर शेयर किए गए अपने संदेश में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि व्हाइट हाउस में दुनिया की शीर्ष टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद इस फोर्स का गठन किया गया है। प्रेसिडेंट के इस नए मैंडेट के मुताबिक, SIF को सिविल सोसाइटी, सेफ्टी एडवोकेसी और प्राइवेट इंडस्ट्री के साथ सरकार के प्राइमरी संपर्क के तौर पर काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि अमेरिका इस अत्याधुनिक तकनीक में दुनिया का नेतृत्व जारी रख सके। ट्रंप का मानना है कि सुपर इंटेलिजेंस का यह दौर इंडस्ट्रियल क्रांति और इंटरनेट से भी कहीं अधिक बड़ा बदलाव साबित होगा।
इस नई सुपर इंटेलिजेंस फोर्स की कमान चार सदस्यों वाली लीडरशिप टीम के हाथों में होगी। इसमें नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जे क्लेटन, फेडरल ट्रेड कमीशन के चेयरमैन एंड्रयू फर्ग्यूसन, चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर और रिसर्च एंड इंजीनियरिंग के अंडर सेक्रेटरी एमिल माइकल, और ऑफिस ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट के डायरेक्टर स्कॉट कुपोर शामिल हैं। यह लीडरशिप ग्रुप सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति और चीफ ऑफ स्टाफ सूसी विल्स को रिपोर्ट करेगा।
इस पहल से पहले व्हाइट हाउस में एक हाई-लेवल लंच का आयोजन किया गया था, जिसमें स्पेसएक्स और टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क, मेटा के CEO मार्क ज़करबर्ग, गूगल के CEO सुंदर पिचाई, और NVIDIA के CEO जेन्सेन हुआंग समेत कई दिग्गज टेक लीडर्स शामिल हुए थे। बैठक में इस तकनीक को इंसानी इतिहास की सबसे बड़ी छलांग करार दिया गया। टेक दिग्गजों ने भी इस दिशा में मिलकर काम करने और सुपर इंटेलिजेंस को पूरी तरह सुरक्षित रूप से विकसित करने पर अपनी सहमति जताई है।
नया आदेश आने वाले दिनों में अमेरिकी तकनीकी नीतियों और कानूनी परिभाषाओं में एक बड़ा बदलाव लाने वाला है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।



