लखनऊ। आधुनिक जीवनशैली में स्मार्टफोन हमारी आदतों में इस कदर शुमार हो गया है कि अब लोग इसे टॉयलेट तक ले जाने लगे हैं। जिसे हम एक सामान्य और हानिरहित आदत समझते हैं, वह वास्तव में हमारी ‘पेल्विक हेल्थ’ के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, टॉयलेट सीट पर बैठकर फोन चलाने से 10 से 15 मिनट का समय कब बीत जाता है, इसका अंदाजा नहीं होता, लेकिन यह शरीर के निचले हिस्सों पर अनावश्यक और हानिकारक दबाव पैदा करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार मुताबिक, टॉयलेट सीट का डिजाइन सामान्य कुर्सी जैसा नहीं होता, जिससे वहां लंबे समय तक बैठने पर रेक्टम को सहारा नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में गुरुत्वाकर्षण के कारण रक्त का प्रवाह नीचे की ओर बढ़ने लगता है और ब्लड वेसल्स पर दबाव बढ़ जाता है। यदि कोई व्यक्ति टॉयलेट सीट पर 10 मिनट से अधिक समय बिताता है, तो यह दबाव एनल कैनाल की नसों में सूजन पैदा कर देता है, जिसका परिणाम अक्सर पाइल्स (बवासीर) के रूप में सामने आता है। इसमें मरीज को असहनीय दर्द और ब्लीडिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

समस्या केवल शारीरिक दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के प्राकृतिक तंत्र को भी बाधित करती है। जब व्यक्ति फोन की स्क्रीन में खो जाता है, तो वह शरीर द्वारा मिलने वाले प्राकृतिक संकेतों को नजरअंदाज कर देता है। इससे मल कोलन में अधिक समय तक रहता है और सूख जाता है, जो कब्ज और एनल फिशर जैसी बीमारियों का मुख्य कारण बनता है। डॉक्टर इसे ‘स्ट्रेनिंग पैराडॉक्स’ कहते हैं, जहाँ व्यक्ति बिना जोर लगाए भी अपने पेल्विक फ्लोर को नुकसान पहुँचा रहा होता है।

इस स्वास्थ्य संकट से बचने के लिए डॉक्टरों ने ‘5 मिनट का नियम’ अपनाने की सलाह दी है। इसके तहत यदि 5 मिनट के भीतर प्राकृतिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो वहां बैठे रहने के बजाय उठ जाना चाहिए। इसके साथ ही, टॉयलेट में फोन ले जाने की आदत को पूरी तरह त्यागना अनिवार्य है। बैठने के सही तरीके में बदलाव और आहार में फाइबर व पानी की मात्रा बढ़ाकर इन गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। अगली बार टॉयलेट जाते समय फोन को बाहर छोड़ना ही आपकी सेहत के हक में होगा।

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