अक्सर आपने अपने आस-पास, ऑफिस में या फिर घर पर कुछ ऐसे लोगों को जरूर देखा होगा जो कुर्सी या सोफे पर बैठते ही लगातार अपना पैर हिलाना शुरू कर देते हैं। कई बार टोकने पर वे थोड़ी देर के लिए रुक तो जाते हैं, लेकिन जैसे ही उनका ध्यान भटकता है, वे दोबारा पैर हिलाने लगते हैं। लोग आमतौर पर इसे एक सामान्य या साधारण आदत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या वाकई यह नॉर्मल है? फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल की कंसल्टेंट (साइकायट्री) डॉ. गायत्री भाटिया के अनुसार, इस सबकॉन्शियस आदत के पीछे कई गंभीर शारीरिक और मानसिक कारण छिपे हो सकते हैं [cite: आइए डॉ. गायत्री भाटिया (कंसल्टेंट, साइकायट्री, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानें बैठे-बैठे पैर हिलाने की आदत के पीछे कौन-कौन से कारण हो सकते हैं।]।

रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (RLS)

लगातार पैर हिलाने के पीछे सबसे बड़ी चिकित्सकीय वजह एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर हो सकता है, जिसे ‘रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम’ कहा जाता है। इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति के पैरों में एक अजीब सी बेचैनी, खुजली, रेंगने या सुइयां चुभने जैसा एहसास होता है। इस असहजता को कम करने के लिए मरीज को मजबूरन पैर हिलाना पड़ता है, जिससे उन्हें कुछ समय के लिए राहत मिलती है [cite: इस डिसकम्फर्ट को कम करने के लिए मरीज को न चाहते हुए भी मजबूरन अपने पैरों को हिलाना पड़ता है। पैर हिलाने से उन्हें कुछ समय के लिए आराम मिलता है।]। रात को सोते समय या लंबे समय तक बैठने पर यह समस्या और बढ़ जाती है, जिससे व्यक्ति की नींद बुरी तरह प्रभावित होती है [cite: यह समस्या ज्यादातर तब गंभीर रूप ले लेती है जब व्यक्ति आराम कर रहा होता है, जैसे- रात को सोते समय या लंबे समय तक एक जगह बैठे रहने पर। इसके कारण व्यक्ति की नींद काफी प्रभावित होती है।]।

अत्यधिक एंग्जायटी या स्ट्रेस

जब कोई व्यक्ति बहुत मानसिक तनाव, घबराहट या एंग्जायटी से गुजर रहा होता है, तो उसका शरीर इस दबे हुए तनाव को बाहर निकालने का रास्ता खोजता है [cite: जब कोई व्यक्ति बहुत मानसिक तनाव, एंग्जायटी या घबराहट से गुजर रहा होता है, तो उसका शरीर इस तनाव को बाहर निकालने का रास्ता खोजता है।]। तनाव की स्थिति में शरीर में कोर्टिसोल और एड्रिनलिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है, जो शरीर के भीतर नर्वस एनर्जी पैदा करते हैं [cite: तनाव की स्थिति में शरीर में कोर्टिसोल और एड्रिनलिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है, जिससे शरीर में नर्वस एनर्जी पैदा होती है।]। शांत बैठे रहने पर भी यह एनर्जी अंदर ही अंदर छटपटाहट पैदा करती है। इसे रिलीज करने के लिए लोग अनजाने में पैर हिलाने लगते हैं या नाखून चबाने लगते हैं [cite: इसे रिलीज करने के लिए लोग अनजाने में ही पैर हिलाने लगते हैं, नाखून चबाने लगते हैं…]। यह दिमाग को शांत करने का एक ‘सेल्फ-सूदिंग मैकेनिज्म’ होता है [cite: यह एक तरह का सेल्फ-सूदिंग मैकेनिज्म है, जिससे दिमाग को शांत करने की कोशिश की जाती है।]।

बोरियत और अधीरता (Impatience)

पैर हिलाने का एक और सामान्य मनोवैज्ञानिक कारण है बोरियत या लंबा इंतजार करना। किसी उबाऊ मीटिंग या क्लास में खाली बैठे रहने पर दिमाग को व्यस्त रखने और अपनी छटपटाहट छुपाने के लिए पैर हिलाना एक सबकॉन्शियस आदत बन जाती है, जो यह दर्शाती है कि व्यक्ति वहां से जल्द बाहर निकलना चाहता है [cite: जब कोई व्यक्ति किसी ऐसी जगह पर फंसा हो जहां उसे बहुत लंबा इंतजार करना पड़ रहा हो या वह किसी बेहद उबाऊ मीटिंग या क्लास में बैठा हो, तो ऐसे समय में खाली बैठे-बैठे दिमाग को व्यस्त रखने और अपनी छटपटाहट को छुपाने के लिए पैर हिलाना एक सबकॉन्शियस आदत बन जाती है।

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