अंडा सुबह के नाश्ते का सबसे पौष्टिक और लोकप्रिय विकल्प माना जाता है। लेकिन अक्सर यह बहस होती है कि इसका पीला भाग यानी ‘अंडे की जर्दी’ खानी चाहिए या नहीं। दरअसल, जहाँ अंडे का सफेद हिस्सा प्रोटीन का खजाना है और हर किसी के लिए फायदेमंद है, वहीं पीले हिस्से में फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है। यही वजह है कि कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों में इसे खाने से परहेज करना चाहिए। आइए जानते हैं किन लोगों को अंडे की जर्दी से दूरी बनानी चाहिए।

बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल वाले रहें सावधान

अंडे के पीले भाग में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा काफी अधिक होती है। अगर किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल लेवल पहले से ही बढ़ा हुआ है, तो जर्दी का सेवन उनकी परेशानी बढ़ा सकता है। इससे रक्त धमनियों के बंद होने का खतरा पैदा हो सकता है, इसलिए ऐसे लोगों को सिर्फ अंडे का सफेद भाग खाने की सलाह दी जाती है।

दिल के मरीजों के लिए खतरनाक

जो लोग दिल की किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें कम फैट वाला आहार लेने की हिदायत दी जाती है। अंडे की जर्दी में मौजूद अधिक फैट दिल पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। ऐसे में हृदय रोगियों को अंडे के सफेद हिस्से तक ही सीमित रहना चाहिए।

डायबिटीज के मरीज बरतें एहतियात

शुगर या डायबिटीज के मरीजों को केवल मीठे से ही नहीं, बल्कि अधिक वसा वाले भोजन से भी बचना चाहिए। अधिक मात्रा में जर्दी का सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों में हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि डॉक्टर उन्हें सोच-समझकर और सीमित मात्रा में ही अंडा खाने की सलाह देते हैं।

वजन नियंत्रण रखने वाले रहें सतर्क

फिटनेस फ्रीक और वजन पर नज़र रखने वाले लोगों के लिए अंडे का पीला भाग ऊर्जा का तो अच्छा स्रोत है, लेकिन इसमें कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। ऐसे में वजन को संतुलित रखने के लिए जर्दी और सफेद भाग का सही अनुपात में सेवन करना ज़रूरी है।

कमजोर पाचन वालों को करना चाहिए परहेज

जिन लोगों का पेट संवेदनशील है या जिन्हें भारी खाना पचाने में दिक्कत होती है, उनके लिए अंडे का पीला भाग थोड़ा भारी साबित हो सकता है। ऐसे में बच्चों और बड़ों दोनों को ही, जिनका पाचन जल्दी बिगड़ता है, जर्दी का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।

गौरतलब है कि एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोज़ाना एक पूरा अंडा खाना फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें कई आवश्यक विटामिन और पोषक तत्व होते हैं। लेकिन अगर आप किसी बीमारी से ग्रस्त हैं, तो अपनी डाइट में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

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