नई दिल्ली: सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन के पूर्व सिक्योंग लोबसांग सांगे ने हाल ही में भारत में संपन्न हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक को वैश्विक राजनीति के लिहाज से “बेहद महत्वपूर्ण” करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बैठक चीन की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी और उसकी विस्तारवादी नीतियों को लेकर दुनिया भर में उपजी चिंताओं के कारण बदलते भू-राजनीतिक तालमेल को साफ तौर पर प्रदर्शित करती है।

मीडिया को दिए एक विशेष साक्षात्कार में लोबसांग सांगे ने कहा कि वर्तमान में एक नई जियोपॉलिटिकल सच्चाई सबके सामने है, जहां चीन की विस्तारवादी नीतियों को देखते हुए लोकतांत्रिक देश एक नए गठबंधन और तालमेल की ओर बढ़ रहे हैं।

“चीन को लेकर काफी सख्त हैं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो”

लोबसांग सांगे ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की हालिया भारत यात्रा और वहां हुई उच्च स्तरीय बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि यह दौरा दर्शाता है कि अमेरिका, भारत के साथ अपने रिश्तों को कितना सर्वोच्च महत्व देता है। सांगे ने रूबियो के साथ पिछले वर्षों में हुई अपनी मुलाकातों को याद करते हुए कहा:

“मार्को रूबियो चीन की नीतियों और उसकी विस्तारवादी सोच को लेकर बेहद सख्त और मजबूत रुख रखते हैं। अमेरिका और भारत जैसी बड़ी ताकतों का साथ आना इस बात का प्रमाण है कि लोकतांत्रिक मूल्य अब एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी में बदल रहे हैं।”

सांगे ने हार्वर्ड बेलफर सेंटर के एक हालिया शैक्षणिक अध्ययन (स्टडी) का भी हवाला दिया। इस स्टडी में भारत सहित दुनिया के 13 देशों को ‘मिडिल पावर्स’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में बेहद अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आकलन यह साबित करते हैं कि लोकतांत्रिक देशों को अब और अधिक एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा, “सभी लोकतांत्रिक देशों को एक साथ आना चाहिए और मूल्यों पर आधारित (वैल्यू-बेस्ड) रिश्ते बनाने चाहिए।”

“115 देशों में फैला है चीन का सर्विलांस नेटवर्क”

गहरे रणनीतिक सहयोग की वकालत करते हुए पूर्व तिब्बती सिक्योंग ने चीन की बढ़ती वैश्विक पैठ को लेकर दुनिया को आगाह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजिंग तकनीकी और सुरक्षा बुनियादी ढांचे के जरिए दुनिया भर में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। सांगे ने चेतावनी देते हुए कहा:

“चीन दुनिया के देशों में बहुत अंदर तक घुसपैठ कर रहा है। उसने अपना खतरनाक सर्विलांस (निगरानी) सिस्टम दुनिया के कम से कम 115 देशों में एक्सपोर्ट किया है। उनका जाल हर जगह फैल चुका है।”

उन्होंने अमेरिका और अन्य प्रमुख लोकतांत्रिक देशों से अपील की कि वे चीन के इस बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए ‘वैल्यू-बेस्ड मिडिल पावर्स’ के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करें और एक ठोस गठबंधन बनाकर समन्वित कार्रवाई करें।

तिब्बत के भविष्य पर ‘मिडल वे अप्रोच’ और चीन का रवैया

तिब्बत के भविष्य और उसके राजनीतिक संकट पर बोलते हुए लोबसांग सांगे ने स्पष्ट किया कि तिब्बत आज भी ‘अहिंसा और बातचीत’ के जरिए समाधान निकालने की अपनी नीति पर कायम है, जिसे मध्यम मार्ग नीति कहा जाता है।

सांगे ने तिब्बत के रुख को साफ करते हुए कहा, “अगर चीन तिब्बतियों पर अत्याचार करना, उन पर दबाव बनाना और उनके साथ नस्लीय भेदभाव करना बंद कर दे, तो हम चीन के संविधान के दायरे में ही तिब्बत के लिए वास्तविक स्वायत्तता की मांग करेंगे। हम चीन से पूरी तरह अलग होने की मांग नहीं कर रहे हैं, यही हमारा समझौता है। लेकिन बदकिस्मती से चीनी सरकार का रवैया सकारात्मक नहीं है; उन्हें केवल लेना आता है, देना नहीं।”

उन्होंने भारत, नेपाल, भूटान के साथ-साथ दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में चीन के अवैध क्षेत्रीय दावों का भी उल्लेख किया और दोहराया कि तिब्बत बिना किसी हिंसा के केवल बातचीत के माध्यम से अपने मसले को सुलझाना चाहता है।

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