लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक अग्निकांड पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। शीर्ष अदालत ने अपने पुराने आदेशों के उल्लंघन और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई न होने को बेहद गंभीरता से लिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को अवमानना नोटिस जारी किया है और LDA उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का सख्त निर्देश दिया है।

यह पूरा मामला शहर में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माणों, अग्नि सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा है। अदालत ने हादसे की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) से पूरी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में तलब की है। सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त कार्रवाई के बाद LDA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि यह आदेश सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे अवैध कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई का मुख्य आधार बन सकता है।

इस घटना ने एक बार फिर विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों को उजागर कर दिया है। प्रशासन और स्थानीय निकायों की मिलीभगत से शहर के रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रहे संस्थान अब जांच के घेरे में आ गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि बच्चों की सुरक्षा और जीवन से खिलवाड़ करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में एलडीए और अन्य संबंधित विभागों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

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