भारत और बांग्लादेश के बीच के कूटनीतिक रिश्तों में एक बार फिर से तनाव के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर भारत से यह अपील की है कि वह अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारतीय क्षेत्र से किसी भी प्रकार के राजनीतिक भाषण देने या बयान जारी करने से रोके। ढाका का कहना है कि ऐसे बयानों से दोनों देशों के बीच के द्विपक्षीय संबंधों के अस्थिर होने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। यह पूरा घटनाक्रम दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे राजनीतिक और कानूनी मतभेदों के बीच सामने आया है।
यह संवेदनशील मुद्दा हाल ही में ढाका के तेजगांव स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान उठाया गया। इस मीटिंग में बांग्लादेश में भारत के नवनियुक्त हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कोबीर आमने-सामने थे। हालांकि शुरुआती बातचीत शिष्टाचार भेंट और आपसी हितों के मुद्दों पर आधारित थी, लेकिन जल्द ही चर्चा का रुख शेख हसीना की गतिविधियों की ओर मुड़ गया। बांग्लादेशी पक्ष ने सोशल मीडिया पर चल रही उन रिपोर्ट्स का हवाला दिया जिनमें कहा जा रहा था कि शेख हसीना 5 अगस्त को कोई सार्वजनिक बयान दे सकती हैं।
विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कोबीर ने भारतीय उच्चायुक्त को स्पष्ट रूप से बताया कि ढाका को पूरी उम्मीद है कि भारत यह सुनिश्चित करेगा कि बांग्लादेश में प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े लोग या भगोड़ी घोषित की गईं शेख हसीना भारतीय जमीन का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों या बांग्लादेश में अस्थिरता फैलाने के लिए न करें। इसके अलावा, बैठक में दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण के मामलों पर भी चर्चा हुई। गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में अंतरिम सरकार ने भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग की थी, जिस पर भारत का कहना है कि यह मामला कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जांच के दायरे में है।
शेख हसीना पिछले साल 5 अगस्त 2024 को बड़े छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के बाद भारत आ गई थीं, जिसके चलते उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें 2024 के प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों के मामले में मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी। दूसरी ओर, हाल ही में हसीना ने यह भी ऐलान किया था कि वे दिसंबर के आसपास अपनी पार्टी के नेताओं के साथ स्वदेश लौटने का इरादा रखती हैं। बहरहाल, ढाका की इस ताजा अपील ने नई दिल्ली के समक्ष एक नया कूटनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है, और आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।



