अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भारत के प्रमुख क्रेडिट रेटिंग संस्थानों में से एक, केयरएज ग्रुप (CareEdge Group) से इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दुनिया का पहला कॉम्प्रिहेंसिव क्रेडिट फ्रेमवर्क तैयार करने की जोरदार अपील की है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर लैंडस्केप तेज़ी से बदल रहा है, तो देश के रिस्क को मापने वाले फ्रेमवर्क यहां की असीम संभावनाओं को क्यों नहीं पहचान सकते। उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह की पहल की शुरुआत भारत से ही होनी चाहिए।
गौतम अदाणी ने अपने संबोधन में बताया कि उनका और केयरएज ग्रुप का रिश्ता करीब दो दशकों पुराना है, जो आज 100 से ज्यादा संस्थाओं में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रेटेड एसेट्स तक फैल चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक विश्लेषणात्मक फ्रेमवर्क ऐसे समय में विकसित किए गए थे जब इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार धीमी थी और एसेट्स का आकलन सिंगल-एसेट डिस्काउंटेड कैश-फ्लो मॉडल के जरिए अलग-अलग किया जा सकता था। लेकिन अब भारत के बुनियादी ढांचे का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है, जिसके चलते मूल्यांकन के तरीकों में भी बदलाव की जरूरत है।
उन्होंने मुख्य रूप से तीन प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर का जिक्र किया—रिप्लेसमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रोथ इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर’। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट, केरल के विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट और खावड़ा के 30-गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी पार्क का हवाला देते हुए उन्होंने समझाया कि आज की वैल्यू सिर्फ एक स्टैंडअलोन एसेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक इंटरकनेक्टेड नेटवर्क और इकोसिस्टम मल्टीप्लायर पर आधारित है। उदाहरण के लिए, खावड़ा प्रोजेक्ट एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ जोड़ता है, जहां असली वैल्यू इन सभी के मिलने वाले चौराहे पर बनती है।
अदाणी ने जोर देकर कहा कि इस नए फ्रेमवर्क का उद्देश्य स्टैंडर्ड को कम करना या जांच से बचना नहीं है, बल्कि एक ‘वाइडर लेंस’ और डायनामिक मॉडल अपनाना है जो अनवायबल एम्बिशन और ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म के बीच अंतर कर सके जिनकी रणनीतिक वैल्यू पारंपरिक पैमानों से कहीं आगे तक फैली हुई है। यह प्रस्ताव मल्टी-डाइमेंशनल इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉवरेन रेजिलिएंस का सही आकलन करने में मदद करेगा, जो भविष्य में उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक ग्लोबल बेंचमार्क बन सकता है।



