राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोकतंत्र को लेकर बड़ा बयान दिया। नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बहस, संवाद, विरोध और विपक्ष लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन लोगों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग रहना चाहिए।

मोहन भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार और मत होना स्वाभाविक है। लोगों को अपने तर्क रखने और दूसरों के विचारों का जवाब देने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों पर सवाल उठाना जरूरी है और इसे मजबूती के साथ किया जाना चाहिए।

RSS प्रमुख ने कहा कि विरोधी विचार और अलग-अलग तरीके से अपनी बात रखने की प्रक्रिया लोकतंत्र की पहचान है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद, बहस और तर्क-वितर्क की व्यवस्था होती है, लेकिन इन सभी के साथ जिम्मेदारी का ध्यान रखना जरूरी है।

मोहन भागवत ने संविधान निर्माण के समय डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि देश को उनके दिखाए रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विरोध और आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इसमें जिम्मेदारियों को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।

उन्होंने युवाओं को देश की “डेमोग्राफिक डिविडेंड” बताते हुए कहा कि युवा शक्ति को सही दिशा और मार्गदर्शन देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर युवाओं का सही पोषण और विकास किया जाए तो वे देश की बड़ी ताकत बन सकते हैं।

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