उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां PUBG गेम की लत और कर्ज के दलदल में फंसे 11वीं के एक छात्र ने अपने ही अपहरण की झूठी कहानी गढ़ डाली। पिता से एक लाख रुपये ऐंठने के लिए छात्र ने न सिर्फ खुद का अपहरण नाटक रचा, बल्कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से अपनी आंख में गंभीर चोट की फर्जी तस्वीर बनाकर पिता को भेज दी। हालांकि, गोरखपुर पुलिस की मुस्तैदी और तकनीकी सर्विलांस के चलते महज सवा दो घंटे के भीतर ही इस पूरी फर्जी साजिश का पर्दाफाश हो गया।
क्या है पूरा मामला?
संतकबीरनगर जिले के धनघटा क्षेत्र का रहने वाला यह 11वीं का छात्र गोरखपुर के सिकरीगंज इलाके में रहकर पढ़ाई करता है। पुलिस के मुताबिक, किशोर ऑनलाइन गेम PUBG खेलने का बुरी तरह आदी हो चुका था। गेम में पैसे हारने के कारण उस पर लगातार कर्ज बढ़ता जा रहा था। पॉकेट मनी खत्म होने के बाद उसने अपने दोस्तों से भी पैसे उधार ले लिए थे। जब कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ा और घर से सीधे पैसे मांगने की हिम्मत नहीं हुई, तो उसने खुद के अपहरण की एक खतरनाक योजना बना ली।
पब्लिक वाईफाई और AI का खतरनाक इस्तेमाल
साजिश के तहत छात्र ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया और पब्लिक वाईफाई का इस्तेमाल करके अपने व्यापारी पिता के व्हाट्सएप पर एक लाख रुपये की फिरौती का मैसेज भेजा। अपनी इस झूठी कहानी को सच साबित करने के लिए उसने दिल्ली में रहने वाली अपनी एक महिला मित्र से संपर्क किया और AI की मदद से अपनी आंख पर गंभीर चोट या फूटी हुई आंख जैसी डरावनी तस्वीर तैयार करवाई। जब पिता ने अपने बेटे की ऐसी हालत देखी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और वे तुरंत सिकरीगंज थाने पहुंचे।
महज सवा दो घंटे में पुलिस ने सुलझाई गुत्थी
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ खजनी दीपांशी राठौर के निर्देशन में पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और वाईफाई लोकेशन का सहारा लिया। भले ही छात्र का फोन बंद था, लेकिन पब्लिक वाईफाई के इस्तेमाल ने उसकी लोकेशन खोल दी। पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए महज सवा दो घंटे के भीतर ही छात्र को उरूवा स्थित उसके एक दोस्त के घर से सकुशल बरामद कर लिया।
पुलिस की पूछताछ में किशोर ने खुद स्वीकार किया कि उसने कर्ज चुकाने के लिए यह नाटक रचा था। पुलिस अब इस पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि किस तरह ऑनलाइन गेमिंग की लत और तकनीक का गलत इस्तेमाल बच्चों को अपराध के रास्ते पर धकेल रहा है।



