नई दिल्ली। सीबीएसई 12वीं की परीक्षा के नतीजों में कथित गड़बड़ियों को लेकर देशभर में उठे बवाल के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पूरे मामले को ‘सोची-समझी साजिश’ करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर पलटवार किया है ।
जनता को जवाब देने की जिम्मेदारी लें प्रधानमंत्री
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, सीबीएसई परीक्षा परिणाम में भयंकर हेर-फेर हो गई, जिससे देश के लाखों बच्चे और उनके माता-पिता सदमे में हैं। और मोदी जी? हमेशा की तरह- न जवाब, न जिम्मेदारी। उन्होंने इस घटना को एक गलती नहीं बल्कि एक सोचा-समझा षड्यंत्र करार दिया ।
COEMPT पर उठाए सवाल, पुराने विवादों का किया जिक्र
राहुल गांधी ने अपने हमले का केंद्र उस कंपनी COEMPT को बनाया जिसे CBSE ने डिजिटल मूल्यांकन यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम का ठेका दिया था । उन्होंने आरोप लगाया कि यह कंपनी पहले Globarena के नाम से काम करती थी और साल 2019 में तेलंगाना में इसी तरह की गड़बड़ियों के केंद्र में थी । राहुल ने सवाल उठाया, नाम बदला, पर नीयत वही, फितरत वही। इतिहास सबको पता था, फिर भी ठेका दे दिया गया। ऐसी कंपनी के हाथ में 18.5 लाख बच्चों का भविष्य सौंप दिया गया और किसी को फर्क नहीं पड़ा।
ये सवाल पूछ रहे हैं राहुल गांधी
कांग्रेस नेता ने सरकार से कई सख्त सवाल पूछे हैं……
- COEMPT को CBSE का ठेका आखिर क्यों और किसके कहने पर दिया गया?
- कौन-से नियम-प्रक्रियाएँ दरकिनार कर यह ठेका इस कंपनी को सौंपा गया?
- जब कंपनी पहले ही विवादों में घिर चुकी थी, तो CBSE को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? बैकग्राउंड चेक क्यों नहीं किए गए?
- COEMPT के प्रबंधन और मोदी सरकार के बीच आखिर क्या संबंध हैं?
हम इस भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे
राहुल गांधी ने मांग की कि इस पूरे घोटाले के असली दोषियों को सामने लाने के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक जांच और SIT का तत्काल गठन किया जाए । छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, CBSE के Gen Z साथियों, आपकी मेहनत, आपका भविष्य, कोई चुरा नहीं पाएगा। हम इस साजिश की तह तक जाएंगे और इस भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, CBSE द्वारा इस साल पहली बार लागू OSM सिस्टम के तहत छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके ऑनलाइन जाँच के लिए भेजा गया था । परिणाम आने के बाद जब छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए अपनी कॉपियाँ मँगवाईं तो कई विसंगतियाँ सामने आईं। कुछ छात्रों ने दावा किया कि स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएँ उनकी नहीं हैं और उनमें हैंडराइटिंग तक मैच नहीं कर रही ।



