डेस्क : “कानून के हाथ लंबे होते हैं और न्याय मिलने में भले ही देरी हो, लेकिन अंधेर नहीं होती”— यह कहावत बिहार की एक अदालत के हालिया फैसले से पूरी तरह सच साबित हुई है। वैशाली जिले की एक अदालत ने साल 1992 (लगभग 34 साल पहले) के एक हत्या के प्रयास के मामले में एक 84 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति, दीप राय को दोषी ठहराया है। अदालत का यह ऐतिहासिक फैसला इस बात का जीवंत उदाहरण है कि किसी भी आपराधिक कृत्य के दशकों बाद भी कानूनी जवाबदेही और उसका परिणाम पूरी तरह बना रहता है।

34 साल बाद कानून ने कसा शिकंजा, इन धाराओं में हुए दोषी
तीन दशकों से भी अधिक समय तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया और देरी के बावजूद, अदालत ने आरोपी दीप राय को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (बलवा), 148 (घातक हथियार से लैस होना) और 307 (हत्या का प्रयास) के तहत गंभीर रूप से दोषी पाया है। इस मामले की सबसे खास और चर्चा का विषय बनी बात यह है कि सजा पाने वाले मुख्य अभियुक्त अब 84 वर्ष के बुजुर्ग हो चुके हैं। वैशाली का यह मामला समाज को एक कड़ा संदेश देता है कि अतीत में किए गए आपराधिक कृत्यों के परिणाम इंसान को बुढ़ापे के आखिरी पड़ाव में भी भुगतने पड़ सकते हैं।

राम भजन की उम्र में जेल की सलाखें, तस्वीरें वायरल
जिस उम्र में आमतौर पर लोग मोह-माया और विवादों से दूर होकर ‘राम भजन’ या ईश-वंदना में अपना समय बिताते हैं, उस उम्र में एक वृद्ध को अपने पुराने कर्मों के कारण जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ रहा है। यह मामला इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है।

अदालत परिसर से सामने आई दीप राय की तस्वीरें बेहद भावुक और ध्यान खींचने वाली हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि वृद्ध का शरीर अब उनका साथ नहीं दे रहा है। उन्हें चलने, उठने और बैठने के लिए भी दो लोगों के सहारे की जरूरत पड़ रही है। लेकिन जब कानून का डंडा चला और इंसाफ की घड़ी आई, तो उम्र की यह लाचारी, बेबसी और शारीरिक अक्षमता भी उनके किसी काम नहीं आ सकी।

02 जून  की 25 बड़ी खबरें | Top 25 News | UP News | Today Hindi News | CM Yogi | Akhilesh |Politics

शेयर करना
Exit mobile version