दिल्ली के जंतर-मंतर के बाद अब झारखंड की राजधानी रांची में भी छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। मानसून की बारिश और खराब मौसम भी छात्रों के हौसले को नहीं तोड़ पा रहा है। कई छात्र अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। सोशल मीडिया के जरिए यह आंदोलन अब राज्यव्यापी रूप लेता जा रहा है, वहीं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है।
रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों का प्रदर्शन
दिल्ली में छात्रों का आंदोलन खत्म होने के बाद झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हजारों छात्र-छात्राओं ने मोर्चा खोल दिया है। छात्र JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं।
JPSC परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद 25 जुलाई से रांची में लगातार प्रदर्शन जारी है। NEET पेपर लीक विवाद के बाद छात्रों के बीच परीक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी और बढ़ गई है।
छात्र आंदोलनों का इतिहास बताता है कि जब युवा अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरते हैं तो कई बार बड़े बदलावों की शुरुआत होती है। दुनिया के इतिहास में ऐसे कई आंदोलन हुए हैं, जिन्होंने शासन, व्यवस्था और समाज पर गहरा प्रभाव डाला।
1. व्हाइट रोज़ सोसायटी (1942-43)
नाजी जर्मनी के दौर में विश्वविद्यालय के छात्रों और एक प्रोफेसर ने मिलकर व्हाइट रोज़ सोसायटी आंदोलन शुरू किया था। यह आंदोलन हिंसा के बजाय विचारों और पर्चों के माध्यम से हिटलर की तानाशाही का विरोध करता था।
इसका उद्देश्य लोगों को नाजी शासन के खिलाफ जागरूक करना और लोकतंत्र व मानवाधिकारों का समर्थन करना था। हालांकि, फरवरी 1943 में कई सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया और हांस शोल व सोफी शोल समेत कई प्रमुख सदस्यों को फांसी दे दी गई।
2. ट्लाटेलोल्को नरसंहार (1968)
मेक्सिको सिटी में 2 अक्टूबर 1968 को हजारों छात्र लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी दमन के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान सेना और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी कर दी।
इस घटना में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और घायल हुए। यह घटना छात्र आंदोलनों पर सरकारी कार्रवाई का एक बड़ा उदाहरण मानी जाती है।
3. ग्रीन्सबोरो सिट-इन्स (1960)
अमेरिका के नागरिक अधिकार आंदोलन में ग्रीन्सबोरो सिट-इन्स का अहम योगदान रहा। चार अफ्रीकी-अमेरिकी छात्रों ने एक रेस्तरां में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
यह आंदोलन तेजी से पूरे अमेरिका में फैल गया और सार्वजनिक स्थानों पर नस्लीय भेदभाव खत्म करने की लड़ाई को नई दिशा मिली।
4. केंट स्टेट आंदोलन (1970)
वियतनाम युद्ध के विरोध में अमेरिकी छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। इस दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कई छात्रों की मौत हो गई। यह घटना अमेरिका के युद्ध विरोधी आंदोलनों का प्रतीक बन गई।
5. सोवेटो विद्रोह (1976)
दक्षिण अफ्रीका में छात्रों ने रंगभेदी शिक्षा व्यवस्था और अपार्थाइड शासन के खिलाफ आंदोलन किया। पुलिस कार्रवाई के बावजूद यह आंदोलन रंगभेद विरोधी संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
6. ईरानी छात्र आंदोलन (1999)
ईरान में छात्रों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन किया। सरकार ने इसे बलपूर्वक दबाने की कोशिश की, लेकिन यह आंदोलन आधुनिक ईरानी इतिहास में दर्ज हो गया।
7. हांगकांग अम्ब्रेला आंदोलन (2014)
लोकतांत्रिक चुनावों की मांग को लेकर हांगकांग के छात्रों ने बड़ा आंदोलन शुरू किया। पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए प्रदर्शनकारियों ने छतरियों का इस्तेमाल किया, जिसके कारण इसे अम्ब्रेला आंदोलन कहा गया।
हालांकि तत्काल राजनीतिक बदलाव नहीं हुआ, लेकिन इस आंदोलन ने लोकतंत्र समर्थक आवाज को दुनियाभर में पहचान दिलाई।
छात्र आंदोलनों का इतिहास बताता है कि युवा शक्ति कई बार सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की बड़ी वजह बनी है। भारत से लेकर दुनिया के कई देशों तक छात्रों ने शिक्षा, लोकतंत्र, समानता और अधिकारों के लिए अपनी आवाज बुलंद की है।



