नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से जारी प्रदर्शन के पीछे एक बेहद सुनियोजित और संगठित डिजिटल वॉर रूम सक्रिय है, जो न केवल भीड़ जुटाने बल्कि पूरे प्रदर्शन की लॉजिस्टिक्स, परिवहन, भोजन-पानी की आपूर्ति और प्रचार-प्रसार तक का प्रबंधन कर रहा है। टेलीग्राम, वॉट्सएप, इंस्टाग्राम, सिग्नल और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर बने बड़े-बड़े ग्रुपों के जरिए प्रदर्शनकारियों को लगातार निर्देश भेजे जा रहे हैं कि किसे, कब और कहां से निकलना है।
20-20 हजार सदस्यों वाले टेलीग्राम ग्रुप
टेलीग्राम पर 20-20 हजार सदस्यों वाले बड़े टीम ग्रुप बनाए गए हैं, जिनमें एक संदेश पहुंचते ही अलग-अलग जगहों से कैब, ऑटो और रैपिडो बुक कर हजारों लोग प्रदर्शन स्थल की ओर निकल पड़ते हैं। यही कारण रहा कि सोमवार और मंगलवार को सुबह खाली दिखने वाला प्रदर्शन स्थल दोपहर तक ठसाठस भर गया था। अधिकांश मामलों में ऑनलाइन किराए का भुगतान पहले ही कर दिया जाता है और चालकों को सिर्फ तय स्थान से यात्रियों को लेकर निर्धारित जगह पहुंचाने के निर्देश मिलते हैं।
रोटेशन सिस्टम से 24 घंटे बनी रहती है भीड़
भीड़ को एक साथ जुटाने की बजाय अलग-अलग समय पर नए समूह भेजने की रणनीति अपनाई गई है। रात में मौजूद कई लोग सुबह नहीं दिखते, जबकि सुबह, दोपहर और शाम को नए समूह लगातार पहुंचते रहते हैं। एक समूह के लौटते ही दूसरा समूह प्रदर्शन स्थल पर पहुंच जाता है, जिससे पूरे दिन और रात भीड़ का स्तर लगभग समान बना रहता है। इस रोटेशन सिस्टम को भी वही डिजिटल वॉर रूम कुशलतापूर्वक संचालित कर रहा है।
पेशेवरों की टीम कर रही संचालन
इस पूरी व्यवस्था के लिए टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट और अन्य प्रोफेशनल बैकग्राउंड वाले लोगों का एक अत्यंत संगठित डिजिटल वॉर रूम काम कर रहा है, जो दिल्ली के अलावा अन्य शहरों से ऑनलाइन सपोर्ट दे रहा है। कुछ एनजीओ और संस्थाएं भी इसमें सक्रिय बताई जा रही हैं, हालांकि इनकी सटीक पहचान की स्पष्ट जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। सोमवार को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाकर भीड़ नियंत्रित करने की कोशिश की थी, लेकिन यह रणनीति कुछ ही घंटों में बेअसर साबित हुई।



