प्रयागराज/हमीरपुर। हमीरपुर जिले के चंदूपुर गांव के 200 से अधिक स्कूली बच्चों और करीब 50 अभिभावकों को स्कूल तक पक्की सड़क की मांग के लिए पांच किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचना पड़ा। इस मामले का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि जिस काम की जिम्मेदारी सरकार की है, उसके लिए छोटे-छोटे बच्चों को सड़क पर उतरना पड़े, यह किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

चंदूपुर गांव में स्कूल जाने वाला रास्ता करीब 1.5 किलोमीटर तक पूरी तरह खराब पड़ा है। बारिश में हालात और बदतर हो जाते हैं, जिससे छोटे बच्चों को रोजाना भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसके मद्देनजर ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से सड़क बनवाने की गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार मजबूर होकर बच्चों और अभिभावकों ने पैदल मार्च निकालकर कलेक्ट्रेट तक विरोध-प्रदर्शन किया।

हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?

इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार, हमीरपुर के डीएम, पीडब्ल्यूडी और अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर तुरंत उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सड़क के लिए 1.81 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पहले से लंबित है, फिर भी काम शुरू नहीं हो सका। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।

'फायरब्रांड गवर्नर और खंडहर में राजा' | पॉवर सेंटर WITH VIRENDRA SINGH |

शेयर करना
Exit mobile version