वेनेजुएला से भारत लाए गए एक भारतीय नाविक के शव को देखकर परिवार के लोग हैरान हो गए है । बता दे कि भारतीय नाविक राकेश चौहान (33) के शरीर से दिमाग, फेफड़े, दिल, लिवर, किडनी समेत कई अंग गायब पाए गए। यह आरोप चौहान के परिवार वालो ने लगाया है।
फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी दी। वही पीड़ित परिवार का आरोप है कि शव का दूसरा पोस्टमार्टम किया गया तो शरीर पर 22 टांके लगे थे। शरीर से तिल्ली, पैंक्रियास, आंत, थायरॉइड ग्लैंड, पैंक्रियास, गॉल ब्लैडर, वॉइस बॉक्स और सांस की नली भी गायब थी। राकेश चौहान उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले थे। वह नवंबर 2025 में मर्चेंट नेवी में शामिल हुए थे और वेनेजुएला में मरीन फिटर के तौर पर काम कर रहे थे।
कंपनी ने राकेश की मौत की जानकारी दी
परिवार के अनुसार, 7 मई को कंपनी ने फोन करके बताया कि राकेश जहाज से गिर गए हैं और उन्हें गंभीर चोट लगी है। अगले दिन परिवार को बताया गया कि उनके बचने की उम्मीद सिर्फ 5% है। उसी शाम कंपनी ने राकेश की मौत की जानकारी दी। कंपनी ने दावा किया कि इलाज के दौरान चक्कर आने से गिरने के बाद हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।
एक कान से दूसरे कान तक कुल 22 टांके लगे, कई हिस्से गायब
परिवार ने बताया कि राकेश की बॉडी इंडिया पहुंचने के बाद डॉक्टरों की टीम ने उसकी जांच की, लेकिन पोस्टमॉर्टम नहीं किया। कहा गया कि वेनेजुएला में हुआ पहला पोस्टमॉर्टम गलत था। इसके बाद देवरिया कलेक्टर मधुसूदन हुल्गी के कहने पर दूसरा पोस्टमॉर्टम किया गया।
परिवार के मुताबिक, जांच में पता चला कि राकेश के शरीर से दिमाग समेत अंदरूनी अंग गायब थे। इसे भूलकर भी न देखें। इस वजह से फोरेंसिक जांच नहीं हो पाई। दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, राकेश के शरीर पर एक कान से दूसरे कान तक गर्दन से नीचे तक 22 टांके लगे थे। परिवार को इस बारे में पहले नहीं बताया गया था।
पत्नी ने कहा – दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
पत्नी रंजना सिंह ने कहा – मेरे पति मर्चेंट नेवी में थे। उनकी तैनाती वेनेजुएला में थी। हमें 7 मई को उनकी मौत की खबर मिली। उस समय बताया गया कि हाई ब्लड प्रेशर और शुगर की वजह से उनकी मौत हो गई, लेकिन हमें उन पर भरोसा नहीं है। वहां सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें मारकर उनकी बॉडी चुरा ली गई।
रंजना सिंह ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परिवार को इंश्योरेंस की रकम तुरंत देने की मांग की। उन्होंने कहा कि छह महीने के बच्चे और बीमार ससुर की जिम्मेदारी अब उन पर है, इसलिए वह परिवार के भरण-पोषण के लिए सरकारी नौकरी देना चाहती हैं।
जाने FSUI ने क्या कहा
FSUI ने कहा, ‘परिवार की सहमति के बिना राकेश के शरीर से सभी ज़रूरी अंग क्यों निकाले गए? परिवार को तब तक अंधेरे में क्यों रखा गया जब तक उन्होंने भारत में दूसरा पोस्टमॉर्टम नहीं करवाया ?’
वही यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि शव की रसीद पर पत्नी रंजना चौरसिया के बजाय ‘अंजना चौरसिया’ के साइन दर्ज किए गए थे। इसके अलावा, राकेश की तैनाती एम्प्लॉयमेंट एग्रीमेंट में बताए गए जहाज़ से अलग जहाज़ पर दिखाई गई थी। ये सभी बातें मामले में गड़बड़ी और संभावित साज़िश की ओर इशारा करती हैं।



