गुजरात के प्रसिद्ध गिर जंगल में एशियाटिक शेरों पर एक बार फिर खतरनाक वायरस का खतरा मंडराने लगा है। पिछले एक हफ्ते के भीतर दो शावकों समेत कुल 8 शेरों की मौत के बाद वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दो शेरों की मौत संदिग्ध ‘बेबिसिया’ वायरस के कारण हुई है, जबकि अन्य शेरों की मौत आपसी संघर्ष और प्राकृतिक कारणों से हुई है।

15 शेर निगरानी में, डॉक्टरों की टीम तैनात

वन विभाग के अनुसार, इस समय गिर में बेबिसिया और सीडीवी (CDV) जैसे वायरस का असर देखने को मिल रहा है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए एहतियात के तौर पर 15 शेरों को ऑब्जर्वेशन (निगरानी) में रखा गया है। बीमार और संदिग्ध शेरों को बाकी झुंड से अलग कर उनका इलाज शुरू कर दिया गया है। करीब 900 एशियाटिक शेरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जंगल में 300 से अधिक अधिकारियों, डॉक्टरों और कर्मचारियों की विशेष टीमें तैनात की गई हैं। वन विभाग का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।

वन मंत्री का बयान

गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने इस स्थिति पर कहा कि दो शेरों की मौत संदिग्ध बेबिसिया वायरस के चलते मानी जा रही है, जबकि बाकी मौतें आपसी संघर्ष की वजह से हुई हैं। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर डॉक्टरों की विशेष टीम तैनात कर दी गई है।

2018 में भी मचाई थी तबाही

गिर का जंगल एशियाटिक शेरों का सबसे बड़ा प्राकृतिक आवास माना जाता है। इससे पहले साल 2018 में भी बेबिसिया वायरस के कारण गिर में 23 शेरों की मौत हो गई थी। एक बार फिर इस संक्रमण के सामने आने से वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

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