आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने हाल ही में बीजेपी में शामिल होकर एक राजनीतिक हलचल मचाई है। लेकिन राघव चड्ढा की यह कहानी सिर्फ एक पार्टी बदलने तक सीमित नहीं है। चार साल पहले राघव चड्ढा ने राज्यसभा में एक अहम बिल पेश किया था, जो आज उनकी स्थिति को पूरी तरह से बदल सकता था। यदि उनका यह दलबदल विरोधी बिल पास हो जाने देता, तो वह आज न तो बीजेपी में जा पाते और न ही पार्टी में बगावत कर पाते।

बता दें, यह दिलचस्प है कि राघव चड्ढा ने 2022 में राज्यसभा में अपने एक निजी सदस्य बिल को पेश किया था, जिसमें दल-बदल विरोधी कानून को और भी कड़ा करने की मांग की गई थी। इस बिल का उद्देश्य था कि अगर कोई सांसद या विधायक अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होता है, तो उसे अपनी पार्टी के कम से कम तीन-चौथाई (3/4) सदस्यों का समर्थन हासिल होना चाहिए। इस बिल के तहत, यदि किसी सांसद या विधायक ने दल बदलने की कोशिश की, तो उसे छह साल तक चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं मिलता।

वर्तमान में, भारत के संविधान में दलबदल विरोधी कानून (दसवीं अनुसूची) के तहत, किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य मिलकर दूसरी पार्टी में जा सकते हैं, और उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जाता। राघव चड्ढा के बिल ने इसे बदलकर इसे तीन-चौथाई तक बढ़ा दिया था। इस बदलाव का उद्देश्य था कि विधायकों और सांसदों के बीच खरीद-फरोख्त और पार्टी बदलने की प्रक्रिया पर लगाम लगाई जा सके।

अगर राघव चड्ढा का यह बिल कानून बन चुका होता, तो उन्हें आज बीजेपी में शामिल होने के लिए अपनी पार्टी के सात सदस्यों का समर्थन प्राप्त करना पड़ता। इसके अलावा, इस बिल के अनुसार, पार्टी छोड़ने के बाद उस सांसद या विधायक पर छह साल तक चुनाव लड़ने की रोक भी होती।

यहां पर विडंबना यह है कि राघव चड्ढा ने खुद ही यह बिल पेश किया था, जिसमें उन्होंने दल-बदल को रोकने के लिए सख्त प्रावधानों की मांग की थी। लेकिन आज वही राघव चड्ढा अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या उनका वह बिल आज उनके पक्ष में काम करता, तो क्या वह पार्टी छोड़ पाते?

राघव चड्ढा का यह कदम केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि यह भारत के दल-बदल विरोधी कानून की सीमाओं और राजनीतिक दुनिया में इसकी उपयोगिता पर भी सवाल उठाता है। हालांकि, यह देखा जाना बाकी है कि क्या राघव चड्ढा का यह कदम अन्य नेताओं और विधायकों के लिए एक मिसाल बनेगा, या यह केवल एक घटनाक्रम के रूप में रह जाएगा।

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