Kolkata : पश्चिम बंगाल की सत्ता से हटने के बाद तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के भीतर बगावत की आग अब दिल्ली तक पहुंच गई है। रविवार को एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के आवास पर उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद दिल्ली में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है और स्पीकर के घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

‘असली’ तृणमूल पर दावे की रणनीति
बागी गुट का नेतृत्व कर रहे सुदीप बंदोपाध्याय ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके पास दो-तिहाई से ज्यादा सांसदों का समर्थन है। उन्होंने कहा, “जब जुलाई में संसद का सत्र शुरू होगा, तब हम आधिकारिक रूप से ‘तृणमूल’ नाम और सिंबल पर अपना दावा पेश करेंगे क्योंकि हमारे पास बहुमत है।” इससे पहले इन बागी सांसदों ने बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक की थी, जिसमें बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे भी मौजूद थे।

त्रिपुरा की पार्टी में विलय की योजना
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी का यह बागी गुट खुद को बचाने के लिए त्रिपुरा की ‘नेशनल नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी’ में विलय करने पर विचार कर रहा है, जो कि एनडीए का हिस्सा है। बागी सांसद शताब्दी राय ने भी संकेत दिया है कि वे नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी के साथ जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि दलबदल कानून से बचने के लिए यह बागी गुट किसी उत्तर-पूर्वी पार्टी के साथ हाथ मिला सकता है।

कानूनी नोटिस ने बढ़ाई ममता बनर्जी की टेंशन
एक तरफ जहां दिल्ली में सांसदों की बगावत जारी है, वहीं बंगाल में कानूनी लड़ाई भी शुरू हो गई है। बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बेटे बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी और सौगत रॉय सहित कई दिग्गज टीएमसी नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा है। इस कानूनी नोटिस और सांसदों के सामूहिक इस्तीफे की खबरों ने टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व को बैकफुट पर ला दिया है। फिलहाल पूरी नजर अब लोकसभा स्पीकर के अगले कदम और जुलाई में शुरू होने वाले संसद सत्र पर टिकी है।

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