रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेव सट्टा एप से जुड़े नेटवर्क को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एजेंसी के मुताबिक, पिछले सात वर्षों में इस पूरे रैकेट ने करीब 43,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की है। इस मामले में रायपुर जेल में बंद दिल्ली के कारोबारी विकास गर्ग और उनसे जुड़ी कंपनियों की 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई हैं। इनमें आवासीय इमारतें, जमीन, शेयर और दूसरी प्रतिभूतियां शामिल हैं।
दुबई से संचालित होता था पूरा खेल
ईडी की जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क दुबई से चलाया जा रहा था और देशभर में एक साथ 2,000 से ज्यादा सक्रिय सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म काम कर रहे थे। हर प्लेटफॉर्म से हर महीने 30 से 40 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा होता था, जिसका 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे मुख्य सिंडिकेट के पास पहुंचता था। एजेंसी का दावा है कि ‘महादेव ऑनलाइन बुक’, ‘रेड्डी अन्ना’ और ‘फेयरप्ले’ जैसे प्लेटफॉर्म 2019 से हर साल चार से पांच हजार करोड़ रुपये की अवैध कमाई कर रहे थे। यह आंकलन जब्त किए गए डिजिटल सबूतों और पैनल ऑपरेटरों के बयानों के आधार पर किया गया है।
19,600 करोड़ की जीएसटी चोरी का शक
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) के अनुसार, इस अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क ने करीब 750 फर्जी शेल कंपनियों के जरिए 70 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लेन-देन किया, जिससे लगभग 19,600 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी होने की आशंका जताई गई है।
अब तक किसकी कितनी संपत्ति हुई जब्त?
महादेव एप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगियों से जुड़ी करीब 1,700 करोड़ रुपये की संपत्ति पहले ही कुर्क की जा चुकी है, जिसमें दुबई के बुर्ज खलीफा, दुबई हिल्स एस्टेट और बिजनेस-बे की प्रॉपर्टी भी शामिल है। दूसरे प्रमोटर रवि उप्पल की 21.45 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं। दिल्ली के कारोबारी विकास गर्ग की 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क हुई हैं, जबकि कोलकाता के हवाला कारोबारी हरिशंकर टिबरेवाल की 388 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी जब्त की जा चुकी हैं। अब तक रायपुर की विशेष अदालत में 74 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ पांच चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं।



