नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मान्यता प्राप्त मदरसों में नियुक्तियों से जुड़े मामले में 350 से ज्यादा शिक्षकों और नॉन-टीचिंग कर्मचारियों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में दायर 40 से ज्यादा रिट पिटीशन को खारिज कर दिया।

कर्मचारियों ने दावा किया था कि उनकी नियुक्तियां नियमित तौर पर हुई थीं

इन याचिकाओं में कर्मचारियों ने दावा किया था कि उनकी नियुक्तियां नियमित तौर पर हुई थीं और इसलिए वे राज्य सरकार की ग्रांट-इन-एड योजना के तहत वेतन पाने के हकदार हैं। हालांकि, इन नियुक्तियों को पहले कलकत्ता हाई कोर्ट के सिंगल जज ने असंवैधानिक घोषित कर दिया था, जिसे बाद में डिवीजन बेंच ने भी बरकरार रखा था।

कोर्ट ने कुछ प्रतिनिधि मामलों की जांच की

याचिकाकर्ताओं ने एक कमेटी के फैसले को भी चुनौती दी थी, जिसमें उनकी नियुक्तियों से जुड़े दावों को खारिज कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2023 में कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के बाद हुई नियुक्तियों की जांच के लिए एक पैनल गठित किया था। जांच के बाद कमेटी ने भी इन दावों को स्वीकार नहीं किया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं से सबसे मजबूत मामलों की पहचान करने को कहा था। इसके बाद कोर्ट ने कुछ प्रतिनिधि मामलों की जांच की।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी देखा कि क्या संबंधित मदरसों के पास नियुक्ति के समय वैध मान्यता मौजूद थी और क्या उनकी मैनेजिंग कमेटियां कानूनी प्रक्रिया के तहत गठित थीं। कोर्ट ने पाया कि किसी भी प्रतिनिधि मामले में राहत देने का कोई आधार नहीं बनता। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी रिट पिटीशन को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाओं में कोई मेरिट नहीं है। इस फैसले के साथ ही सभी याचिकाकर्ताओं के नियुक्ति और वेतन संबंधी दावे समाप्त हो गए।

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