साउथ कोरिया के प्रेसिडेंट ली जे म्युंग ने भारत में अपने तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे का समापन किया, जिसके दौरान दोनों देशों के बीच शिपिंग, शिपबिल्डिंग और मैरीटाइम लॉजिस्टिक्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिला। इस दौरे से कुल 21 महत्वपूर्ण नतीजे सामने आए, जिनमें स्ट्रेटेजिक विज़न डॉक्यूमेंट्स, एग्रीमेंट्स और इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क शामिल हैं।

बता दें, इस दौरे के दौरान भारत और साउथ कोरिया के नेताओं ने कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिससे दोनों देशों की पार्टनरशिप और भी मजबूत हुई। विशेष रूप से शिपबिल्डिंग, बंदरगाह विकास और समुद्री लॉजिस्टिक्स में सहयोग को बढ़ावा दिया गया। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच साझा विज़न ‘VOYAGES’ का समर्थन किया गया, जिसका उद्देश्य समुद्री उद्योगों में सहयोग बढ़ाना है।

प्रेसिडेंट ली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लंबी बातचीत की, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत-ROK कॉम्प्रिहेंसिव फ्रेमवर्क के तहत साझेदारी को और गहरा करने पर सहमति जताई। इसके तहत भारत के 400 से अधिक जहाज़ खरीदने की योजना पर भी चर्चा की गई, जिससे लगभग 25 बिलियन डॉलर के अवसर उत्पन्न होंगे।

इसके अलावा, पोर्ट डेवलपमेंट, साइंस और टेक्नोलॉजी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन ग्रोथ इनिशिएटिव्स के लिए भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए, और भारत-दक्षिण कोरिया के संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में कई घोषणाएं की गईं।

भारत और साउथ कोरिया के बीच एक मज़बूत स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है, और इस दौरे के परिणामस्वरूप उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय और ग्लोबल इकोनॉमिक स्टेबिलिटी में योगदान करते हुए सहयोग और भी गहरा होगा।

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