भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए उन्हें “फ्यूचरिस्टिक पार्टनरशिप” के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के तहत दोनों देशों ने कई वैश्विक और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है।
बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता में यह स्पष्ट किया गया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों देश शांति, स्थिरता और विकास के साझा लक्ष्य के लिए मिलकर काम करेंगे। पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि भारत और कोरिया न केवल आर्थिक और तकनीकी साझेदारी बढ़ा रहा हैं, बल्कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान भी संयुक्त रूप से खोज रहे हैं।
इस बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण यह रहा कि दक्षिण कोरिया ने भारत की दो प्रमुख वैश्विक पहलों—इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI)—में औपचारिक रूप से शामिल होने का फैसला किया है। पीएम मोदी ने इसे दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की नई शुरुआत बताया।
उन्होंने कहा कि आज के समय में जब दुनिया विभिन्न भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही है, भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर शांति और स्थिरता का संदेश दे रहे हैं। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि दोनों देशों की साझेदारी अब “भरोसेमंद सहयोग” से आगे बढ़कर “भविष्य उन्मुख साझेदारी” बन चुकी है।
बता दें, इंटरनेशनल सोलर अलायंस, जिसकी शुरुआत 2015 में भारत और फ्रांस द्वारा की गई थी, आज 120 से अधिक देशों का एक मजबूत वैश्विक मंच बन चुका है। यह गठबंधन सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, स्वच्छ ऊर्जा को सुलभ बनाने और वैश्विक स्तर पर सस्टेनेबल विकास को गति देने का काम करता है। दक्षिण कोरिया का इसमें शामिल होना वैश्विक सोलर मिशन को और मजबूती देगा।
वहीं दूसरी ओर, इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, व्यापार, कनेक्टिविटी और वैज्ञानिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में देशों को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इस पहल का उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक सुरक्षित, स्थिर और नियम आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
भारत और दक्षिण कोरिया ने इस बात पर भी सहमति जताई कि भविष्य में चिप निर्माण, जहाज निर्माण, तकनीक, ऊर्जा, टैलेंट एक्सचेंज और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए आर्थिक अवसर खोलेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक नए शक्ति संतुलन को भी आकार देगी।



