दिल्ली में आने वाले समय में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं। अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (APTEL) ने बिजली वितरण कंपनियों पर लगभग 30,000 करोड़ रुपये के बकाये की अदायगी को लेकर अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद राजधानी के उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का बोझ बढ़ने की आशंका गहरा गई है।

बता दें, दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने APTEL में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि बिजली कंपनियों को बकाये भुगतान के लिए और समय दिया जाए, ताकि अचानक टैरिफ में बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव न पड़े। लेकिन न्यायाधिकरण ने इस दलील को खारिज करते हुए पहले से तय पुनर्भुगतान कार्यक्रम को ही लागू रखने का निर्देश दिया है।

बता दें, यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2025 के आदेश से भी जुड़ा हुआ है, जिसमें सभी राज्यों के बिजली नियामकों को निर्देश दिया गया था कि अप्रैल 2024 से पुराने बकाये की वसूली शुरू कर इसे अप्रैल 2028 तक पूरा किया जाए। साथ ही जरूरत पड़ने पर बिजली दरों में संशोधन की अनुमति भी दी गई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि APTEL के इस फैसले के बाद अब दिल्ली में बिजली दरें बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिन्हें गर्मी के मौसम में एसी, कूलर और अन्य उपकरणों के उपयोग के लिए ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है।

सूत्रों के अनुसार, यह बकाया मुख्य रूप से बिजली खरीद और वितरण के बीच के अंतर से जुड़ा हुआ है। अब बिना मोहलत के भुगतान करना अनिवार्य होगा, जिससे डिस्कॉम्स पर दबाव बढ़ेगा और इसका असर टैरिफ पर पड़ सकता है।

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