डेस्क : नारी शक्ति वंदन संसोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका, जिसके बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। पार्टी नेताओं ने इस मुद्दे को महिलाओं के अधिकारों से जोड़ते हुए जनसमर्थन जुटाने की रणनीति बनाई है। कई राज्यों में आक्रोश सभाएं और रैलियां आयोजित की जा रही हैं, जिनमें महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ाई जा रही है।
क्यों नहीं पास हो सका विधेयक
यह विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। कुल 528 सदस्यों की मौजूदगी में विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सदस्यों ने विरोध किया। विपक्षी दलों ने परिसीमन और सीटों के पुनर्गठन को लेकर आपत्ति जताई, जिसके कारण सरकार का गणित बिगड़ गया और विधेयक पारित नहीं हो सका।
विपक्ष का आरोप और अलग रणनीति
विपक्षी दलों का कहना है कि महिलाओं के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। कुछ राज्यों में इस मुद्दे को परिसीमन से जोड़ते हुए विरोध दर्ज कराया गया है। विपक्ष का दावा है कि सीटों के नए निर्धारण से कई राज्यों की राजनीतिक ताकत प्रभावित हो सकती है, इसलिए उन्होंने विधेयक का विरोध किया।
देशभर में बढ़ रहा राजनीतिक तापमान
विधेयक गिरने के बाद कई जगह महिलाओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। वाराणसी सहित कई शहरों में महिलाओं ने रैलियां निकालकर विरोध जताया। राजनीतिक दल इस मुद्दे को आगामी चुनावों से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। साफ है कि नारी शक्ति वंदन विधेयक अब केवल संसदीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि देशव्यापी राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।
सत्ता और विपक्ष आमने सामने, आरोप प्रत्यारोप तेज
महाराष्ट्र में सत्ता पक्ष के नेताओं ने महिला आरक्षण के समर्थन में देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाने की बात कही। वहीं विपक्षी नेताओं ने महिलाओं के नाम पर संविधान से छेड़छाड़ और परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया। दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली में प्रदर्शन कर मौजूदा सीटों पर तुरंत महिला आरक्षण लागू करने की मांग उठाई। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने केंद्र पर महिलाओं के नाम पर परिसीमन लागू करने की साजिश का आरोप लगाया, जबकि केंद्रीय नेताओं ने विपक्ष पर महिला अधिकारों का अपमान करने का आरोप लगाया।



