देहरादून: प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील पर्वतीय राज्य उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी एक मजबूत और विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। भारत की अध्यक्षता में ओडिशा के पुरी में आयोजित ‘ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण (BRICS DRR) वर्किंग ग्रुप’ की द्वितीय तकनीकी बैठक में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की वैश्विक विशेषज्ञों द्वारा मुक्त कंठ से सराहना की गई है।

इस तीन दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका समेत 11 ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। सम्मेलन में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए सेनानायक SDRF अर्पण यदुवंशी (IPS) और ULMMC के निदेशक शांतनु सरकार ने राज्य की भौगोलिक जटिलताओं, तकनीकी नवाचारों और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी।

इस दौरान विशेष रूप से ‘सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन’ और ‘धराली आपदा प्रबंधन’ कार्यों को उत्तराखंड के सफल मॉडल के रूप में वैश्विक मंच पर सामने रखा गया। उपस्थित प्रतिनिधियों ने इन बेहद जटिल अभियानों को कठिन हिमालयी परिस्थितियों में अटूट धैर्य, आधुनिक तकनीक, कुशल प्रशासनिक समन्वय और मानवीय संवेदनशीलता का एक उत्कृष्ट वैश्विक उदाहरण बताया। इसके साथ ही राज्य की बहु-एजेंसी समन्वय प्रणाली और पूर्व चेतावनी तंत्र को भी खूब सराहा गया।

SDRF सेनानायक अर्पण यदुवंशी ने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संवेदनशील और सक्रिय दृष्टिकोण को दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक योजना और कुशल प्रशासन के जरिए राज्य में जोखिमों को न्यूनतम करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। वहीं, आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के निर्देशन में संचालित हो रहीं तकनीकों जैसे- रिमोट सेंसिंग और डेटा एनालिटिक्स को भी वैश्विक दिग्गजों के साथ साझा किया गया। ब्रिक्स मंच पर मिली यह सराहना उत्तराखंड की सुरक्षा एजेंसियों और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सतत प्रयासों को एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय मान्यता देती है।

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