चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट की ओर से अभिनेता और ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) के प्रमुख विजय की पार्टी व सरकार से जुड़े मामलों में एक बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। अदालत ने सोमवार को करूर भगदड़ के पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देने के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है।
यह पूरा मामला पिछले साल 27 सितंबर का है, जब करूर में विजय की एक राजनीतिक रैली के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। इस गंभीर घटना की निष्पक्ष जांच को ध्यान में रखते हुए, अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच राज्य-स्तरीय एसआईटी (SIT) से लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी। सीबीआई इस मामले में भीड़ प्रबंधन, पार्टी आयोजकों की भूमिका और स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेल की गहन जांच कर रही है।
इस महीने की शुरुआत में, सरकार ने राहत और पुनर्वास के तहत करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले 32 पीड़ितों के कानूनी वारिसों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के आदेश सौंपे थे। हालांकि, अब मद्रास हाईकोर्ट द्वारा इस आदेश को रद्द किए जाने के बाद पीड़ित परिवारों के लिए एक नया मोड़ आ गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी और राजनीतिक हलकों में सरगर्मी काफी तेज हो गई है।



