देश की प्रमुख ज्वेलरी कंपनी Rajesh Exports एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंपनी और उसके प्रमोटर्स से जुड़े ठिकानों पर बेंगलुरु और मुंबई में छापेमारी की है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनी के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया है।

SEBI के अंतरिम आदेश के बाद बढ़ी मुश्किलें

सूत्रों के अनुसार, SEBI ने अपने अंतरिम आदेश में Rajesh Exports पर वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच करीब ₹15.15 लाख करोड़ के कथित Revenue Misrepresentation का प्रथम दृष्टया आरोप लगाया है। नियामक का मानना है कि कंपनी ने कुछ लेनदेन के जरिए अपने राजस्व को वास्तविक आंकड़ों से अधिक दिखाया हो सकता है।

मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से भी जांच

जानकारी के मुताबिक, ED मनी लॉन्ड्रिंग के संभावित पहलुओं को लेकर जांच कर रही है। इसी सिलसिले में कंपनी और प्रमोटर्स से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया गया। जांच एजेंसी फिलहाल दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।

निवेशकों की चिंता बढ़ी

SEBI की कार्रवाई और ED की छापेमारी के बाद कंपनी की साख और निवेशकों के भरोसे पर सवाल उठने लगे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जांच के नतीजे कंपनी के भविष्य और निवेशकों के फैसलों पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

कंपनी ने आरोपों को बताया गलत

Rajesh Exports ने अब तक सामने आए आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। वहीं ED की ओर से छापेमारी को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।

जांच पर टिकी बाजार की नजर

फिलहाल पूरे मामले में नियामक एजेंसियों की जांच जारी है। आने वाले दिनों में ED और SEBI की रिपोर्ट से यह साफ हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और कंपनी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जा सकती है।

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