इटावा : डाकुओं के खौफ के लिए कभी पहचाने जाने वाले चंबल के इलाके में अब अपराध का तरीका बदल गया है। इटावा जिले में एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ पारंपरिक अपराध के बजाय टेक-क्राइम और डिजिटल ठगी के जरिए युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। बिहार के एक लोकप्रिय यूट्यूबर को फ्री फायर (Free Fire) गेमिंग आईडी बेचने के सौदे के बहाने इटावा बुलाकर लाखों रुपये का चूना लगा दिया गया। हालांकि, इटावा पुलिस की तत्परता से पिता-पुत्र समेत तीन शातिर अपराधियों को दबोच लिया गया है।
कैसे बिछाया गया ठगी का जाल?
पूरा मामला इटावा के थाना सिविल लाइन क्षेत्र का है। बिहार के बक्सर जिले (डुमरांव) के रहने वाले यूट्यूबर अंशु कुमार ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। अंशु के अनुसार, ऑनलाइन फ्री फायर गेम की कीमती आईडी खरीदने और बेचने के सिलसिले में उनकी बात इटावा के कुछ युवकों से हुई थी। पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने बेहद शातिराना तरीका अपनाया। उन्होंने अंशु और उनके दो साथियों के आने-जाने के लिए ट्रेन के कन्फर्म टिकट तक बुक करवा कर दिए, ताकि किसी को जरा भी शक न हो।
इटावा रेलवे स्टेशन पहुँचने के बाद आरोपियों ने यूट्यूबर को नगर पालिका के जेई आवास के पास पौधशाला के निकट पहुँचने की लोकेशन भेजी। वहां पहुँचते ही आरोपियों ने बातचीत के दौरान चकमा देकर यूट्यूबर के मोबाइल से गेमिंग आईडी अपने फोन में ट्रांसफर करवा ली। जैसे ही डिजिटल ट्रांसफर पूरा हुआ, आरोपी तय की गई 2 लाख 60 हजार रुपये की रकम का भुगतान किए बिना मौके से रफूचक्कर हो गए। ठगी का अहसास होते ही पीड़ित ने तुरंत थाने पहुँचकर आपबीती सुनाई।
पुलिस की घेराबंदी और आधी रात की मुठभेड़/गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर थाना सिविल लाइन और थाना बढ़पुरा पुलिस की संयुक्त टीम का गठन किया गया। जांच के दौरान पुलिस को सटीक सूचना मिली कि घटना में शामिल आरोपी सफेद रंग की अल्टो कार से उदी की तरफ से लायन सफारी रोड की ओर आ रहे हैं। ठंडी पुलिया के पास पहले से मुस्तैद पुलिस टीम ने घेराबंदी कर कार को रुकवाया और उसमें सवार तीनों संदिग्धों को दबोच लिया।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान ओपेन्द्र भदौरिया, उनके बेटे देवेंद्र और अभिराम के रूप में हुई है, जो इटावा के बढ़पुरा थाना क्षेत्र के निवासी हैं।
अवैध हथियारों का जखीरा और आपराधिक इतिहास
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस उस वक्त हैरान रह गई जब आरोपियों के कब्जे से डिजिटल ठगी के सामान के साथ-साथ अवैध असलहों का बड़ा जखीरा बरामद हुआ। पुलिस ने इनके पास से 315 बोर के दो अवैध तमंचे, 12 बोर की एक अधिया बंदूक, चार जिंदा कारतूस, दो मोबाइल फोन, 850 रुपये नकद और घटना में इस्तेमाल की गई अल्टो कार जब्त की है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि यह गिरोह केवल डिजिटल ठगी ही नहीं करता था, बल्कि अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त में भी लिप्त था। आरोपी ओपेन्द्र भदौरिया और देवेंद्र के खिलाफ पहले से ही धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों के कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। सराहनीय कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा 20 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
डिजिटल संपत्ति के लेनदेन में बरतें सावधानी
यह घटना इस बात की चेतावनी है कि डिजिटल दौर में आभासी संपत्तियों (Gaming IDs, Social Media Accounts) के सौदों में किस कदर खतरा बढ़ गया है। किसी भी अनजान व्यक्ति के डिजिटल दावों या प्रलोभन में आने से पहले पूरी तरह सतर्कता बरतें और वित्तीय लेनदेन हमेशा सुरक्षित व प्रामाणिक माध्यमों से ही करें।














