मुज़फ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले में पुलिस और एसओजी की टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कृषि कार्यों के लिए सरकार द्वारा रियायती दरों पर दी जाने वाली सरकारी यूरिया की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी करने वाले एक शातिर अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। थाना जानसठ पुलिस और एसओजी देहात की संयुक्त टीम ने घेराबंदी करते हुए इस गिरोह के आठ मुख्य सदस्यों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

पुलिस को यह कामयाबी उस वक्त मिली जब आरोपी सरकारी यूरिया की एक बड़ी खेप को तस्करी कर पड़ोसी राज्य हरियाणा ले जाने की फिराक में थे। चेकिंग के दौरान पुलिस टीम ने मौके से अलग-अलग नामी कंपनियों के कुल 454 कट्टे अवैध सरकारी यूरिया बरामद की है।

प्लाईवुड फैक्ट्रियों में ग्लू बनाने का खेल

बता दें, पकड़े गए आरोपियों से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो इस काले धंधे का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया। आरोपियों ने कबूल किया कि वे इस सरकारी यूरिया को उत्तर प्रदेश के किसानों तक पहुँचाने के बजाय दूसरे राज्यों की फैक्ट्रियों में ऊंचे दामों पर बेच देते थे। इस यूरिया का इस्तेमाल मुख्य रूप से हरियाणा और आसपास के राज्यों की प्लाईवुड फैक्ट्रियों में ‘ग्लू’ बनाने के लिए किया जा रहा था। औद्योगिक इस्तेमाल के लिए कमर्शियल यूरिया महंगा होने के कारण फैक्ट्रियां इस सस्ते सरकारी यूरिया को ब्लैक में खरीदती थीं।

गिरोह के 8 शातिर तस्कर गिरफ्तार

एसओजी और स्थानीय पुलिस ने इस रैकेट से जुड़े आठ आरोपियों को दबोचा है, जिनकी पहचान तन्वीर, राहिल, रियासत, मोहित, मनीष, सौरभ, रोहन और सूर्य प्रताप के रूप में हुई है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश में जुटी है कि इन तस्करों को इतनी बड़ी तादाद में सरकारी यूरिया के कट्टे कहाँ से और किन डीलर्स के माध्यम से अलॉट हो रहे थे।

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से किसानों के हक की यूरिया को अवैध तरीके से फैक्ट्रियों में खपा रहा था। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है और इस गिरोह के बाकी मददगारों की तलाश तेज कर दी है।

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