आगरा। ताजमहल देखने हर दिन हजारों लोग पहुंचते हैं। ज्यादा भीड़ से स्मारक को नुकसान न हो, इसलिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI ने नई योजना बनाई है। ASI ने दिल्ली मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा है कि रोज आने वाले पर्यटकों की एक तय संख्या तय की जाए।इस योजना के लिए आईआईटी दिल्ली की टीम ने मई में ताजमहल का दौरा किया था। अध्ययन के लिए टीम ने सवा करोड़ रुपये मांगे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उठा कदम
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी यानी CEC की सिफारिश के बाद लिया जा रहा है। कमेटी ने सुझाव दिया था कि आगरा के सभी ऐतिहासिक स्थलों पर एक समय में कितने लोग आ सकते हैं, इसकी सीमा तय होनी चाहिए। ASI ने सबसे पहले ताजमहल से इसकी शुरुआत करने का फैसला किया है। दिल्ली मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद ही आईआईटी दिल्ली अपना अध्ययन शुरू करेगी। अध्ययन के बाद बताया जाएगा कि रोज कितने पर्यटक आने चाहिए।
पुराने नियम और अब आगे क्या होगा
इससे पहले 2014 में नीरी संस्था ने भी ऐसा ही अध्ययन किया था। उसकी सलाह पर 2018 से ताजमहल में रुकने का समय अधिकतम तीन घंटे कर दिया गया। मुख्य मकबरे के लिए 200 रुपये का अलग टिकट भी लगाया गया। उस समय प्रति घंटे पर्यटकों की संख्या सीमित करने जैसे कुछ सुझाव लागू नहीं हो पाए थे। अब इस नए प्रस्ताव और नियमों पर अंतिम फैसला ASI के दिल्ली मुख्यालय ही लेगा।



