गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में कार्य परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को संपन्न हुई, जिसमें शैक्षणिक, प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर कई बड़े फैसले लिए गए। बैठक में विश्वविद्यालय में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में तीन प्रतिष्ठित शख्सियतों की नियुक्ति को स्वीकृति दी गई, जिनमें ललित कला एवं संगीत विभाग के लिए गोरखपुर के सांसद रवींद्र श्यामनारायण शुक्ला उर्फ रवि किशन शुक्ला, तथा वाणिज्य विभाग के लिए उद्योगपति सी.पी. अग्रवाल और अतुल सर्राफ का नाम शामिल है।

दो विभागों में नए शिक्षकों की नियुक्तियों को मंजूरी

कार्य परिषद ने विश्वविद्यालय के दो विभागों में नए शिक्षकों की नियुक्तियों के चयन का भी अनुमोदन किया। नवनियुक्त शिक्षकों में दो सहायक आचार्य और एक सहयुक्त आचार्य शामिल हैं। सांख्यिकी विभाग में सहयुक्त आचार्य पद पर डॉ. अशोक कुमार पाठक तथा समाजशास्त्र विभाग में सहायक आचार्य पद पर डॉ. पूजा त्रिपाठी और विनय कुमार गुप्ता के चयन को स्वीकृति प्रदान की गई।

11 विभागों के 25 शिक्षक बने वरिष्ठ आचार्य

बैठक का एक और अहम फैसला विश्वविद्यालय के 11 विभागों में कार्यरत 25 आचार्यों को वरिष्ठ आचार्य के पद पर पदोन्नत करने का रहा। पदोन्नति पाने वालों में प्रो. हिमांशु पाण्डेय, प्रो. उमा श्रीवास्तवा, प्रो. अजय सिंह, प्रो. वीना वत्रा कुशवाहा, प्रो. रविकांत उपाध्याय, प्रो. निधि चतुर्वेदी, प्रो. संदीप कुमार, प्रो. करुणाकर राम त्रिपाठी, प्रो. आफशा सिद्दकी, प्रो. सुधा यादव, प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी, प्रो. दिनेश यादव, प्रो. शरद कुमार मिश्र, प्रो. पूजा सिंह, प्रो. हुमा जावेद, प्रो. आलोक कुमार, प्रो. अजय कुमार शुक्ला, प्रो. सुनीता मुर्मू, प्रो. गौरहरि बेहरा, प्रो. शिखा सिंह, प्रो. विनोद कुमार सिंह, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, प्रो. सतीश चन्द्र पाण्डेय, प्रो. मुरली मनोहर पाठक और प्रो. कीर्ति पाण्डेय शामिल हैं।

कुलपति ने जताई उम्मीद, विवि के विकास पर हुआ मंथन

इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय उत्कृष्ट शिक्षण, गुणवत्तापूर्ण शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में नियुक्त विशेषज्ञों के व्यावहारिक अनुभव और नवनियुक्त एवं पदोन्नत शिक्षकों की विद्वता व विशेषज्ञता से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के साथ-साथ उद्योग एवं समाज से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों का भी लाभ प्राप्त होगा। कार्य परिषद की बैठक में विश्वविद्यालय के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं नीतिगत विषयों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

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