लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘टीपू’ से लेकर सूबे के सबसे युवा मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने तक, अखिलेश यादव का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक रहा है। आज उनके जन्मदिन के मौके पर आइए डालते हैं उनके जीवन, शिक्षा और राजनीतिक इतिहास पर एक खोजी नजर।
सैफई से सिडनी तक का शानदार शैक्षणिक सफर
1 जुलाई 1973 को इटावा के सैफई गांव में जन्मे अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव और मालती देवी के पुत्र हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई धौलपुर मिलिट्री स्कूल, राजस्थान से हुई। इसके बाद उन्होंने मैसूर से सिविल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के लिए वह ऑस्ट्रेलिया गए और प्रतिष्ठित सिडनी यूनिवर्सिटी से एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग में मास्टर्स (एम.टेक) की डिग्री पूरी की। 24 नवंबर 1999 को उनका विवाह डिंपल यादव से हुआ।
महज 26 साल की उम्र में पहुंचे संसद
विदेश से पढ़ाई पूरी कर लौटने के बाद अखिलेश यादव ने बहुत कम उम्र में राजनीति के मैदान में कदम रख दिया। सन 2000 में कन्नौज लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव को जीतकर वह महज 26 साल की उम्र में पहली बार लोकसभा पहुंचे। इसके बाद 2004 और 2009 के आम चुनावों में भी उन्होंने इसी सीट से लगातार जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक काबिलियत साबित की।
2012: क्रांति रथ यात्रा और सबसे युवा मुख्यमंत्री
साल 2012 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अखिलेश यादव के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने पूरे प्रदेश में ‘क्रांति रथ यात्रा’ निकाली और साइकिल चलाकर युवाओं को पार्टी से जोड़ा। इसका नतीजा यह हुआ कि सपा ने ऐतिहासिक 224 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। 15 मार्च 2012 को अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के 20वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और महज 38 साल की उम्र में वह प्रदेश के इतिहास के सबसे युवा मुख्यमंत्री बन गए।
अखिलेश सरकार के वो काम, जो ‘विकास मॉडल’ की बने पहचान
मुख्यमंत्री रहते हुए अखिलेश यादव ने यूपी में कई ऐसी योजनाओं और बुनियादी ढांचों की शुरुआत की, जिनकी मिसाल आज भी दी जाती है। इनमें रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हुआ आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे प्रमुख है, जिस पर लड़ाकू विमान भी उतर सकते हैं। इसके अलावा, प्रदेश के 15 लाख से अधिक मेधावी छात्रों को मुफ्त लैपटॉप बांटे गए ताकि ग्रामीण इलाकों के बच्चे भी डिजिटल इंडिया से जुड़ सकें। राजधानी लखनऊ को आधुनिक पहचान देने के लिए मेट्रो रेल, एशिया का सबसे बड़ा जनेश्वर मिश्र पार्क और अंतरराष्ट्रीय स्तर का इकाना क्रिकेट स्टेडियम बनवाया। महिला सुरक्षा के लिए 1090 विमेन पावर लाइन और त्वरित पुलिस मदद के लिए यूपी-100 (अब यूपी-112) जैसी अत्याधुनिक सेवाएं शुरू की गईं।
सूबे से देश तक मजबूत होती पकड़
2017 में सत्ता से बाहर होने के बाद भी अखिलेश यादव ने हार नहीं मानी और पार्टी की कमान पूरी तरह अपने हाथों में ले ली। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में वह खुद करहल सीट से जीतकर पहली बार विधायक बने और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी पुरानी और भरोसेमंद सीट कन्नौज से दोबारा ऐतिहासिक जीत दर्ज की और वर्तमान में लोकसभा सांसद के रूप में विपक्ष की एक मजबूत आवाज हैं। एक इंजीनियर की सोच और आधुनिक विजन के साथ राजनीति करने वाले अखिलेश यादव आज भी देश के सबसे प्रभावशाली युवा नेताओं में शुमार किए जाते हैं।



