गाजियाबाद। डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर साइबर ठगों ने रामप्रस्थ कॉलोनी निवासी 84 वर्षीय सेवानिवृत्त बुजुर्ग से 2.19 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय और यहां तक कि न्यायाधीश बताकर पीड़ित को करीब एक महीने तक मानसिक प्रताड़ना दी और जेल जाने का डर दिखाकर पैसे ऐंठ लिए।
कैसे हुई ठगी की शुरुआत?
रामप्रस्थ कॉलोनी निवासी राम प्रकाश हुर्रिया ने पुलिस शिकायत में बताया कि 22 मई 2026 को उनके पास एक वॉट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को विजय खन्ना बताते हुए दिल्ली के दरियागंज थाने का पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उनके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है और केनरा बैंक के एक खाते से 6.8 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। पीड़ित को निर्देश दिया गया कि वे इस मामले को पूरी तरह गोपनीय रखें और जांच में सहयोग करें, वरना उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
8 घंटे वीडियो कॉल पर रखा डिजिटल अरेस्ट
अगले दिन 23 मई को वॉट्सएप वीडियो कॉल के जरिए एक व्यक्ति ने अपना नाम रोहित गुप्ता बताते हुए खुद को ईडी अधिकारी बताया और करीब 8 घंटे तक लगातार वीडियो कॉल पर बात की। इसी दौरान एक महिला को न्यायाधीश नागराजन बताकर बातचीत कराई गई। कथित जज ने कहा कि जमानत मिलने से पहले उनके सभी बैंक खातों और संपत्तियों की जांच होगी और उन्हें अस्थायी रूप से हिरासत में लिया जाएगा। सत्यापन पूरा होने के बाद पूरी रकम लौटाने का झूठा भरोसा दिया गया। राहुल गुप्ता नाम का एक अन्य व्यक्ति भी लगातार दूसरे नंबर से संपर्क करता रहा।
पांच खातों में 2.19 करोड़ जमा
ठगों के झांसे में आकर पीड़ित ने 26 मई से 4 जून के बीच पांच अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 2.19 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में जमा कर दिए। 26 मई को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया खाते से 52.76 लाख रुपये आईसीआईसीआई बैंक लखनऊ, 27 मई को एक्सिस बैंक से 44.96 लाख रुपये आईडीएफसी फर्स्ट बैंक चेन्नई, 30 मई को 17 लाख रुपये बंधन बैंक कोलकाता, 3 जून को 55 लाख रुपये इंडसइंड बैंक और 4 जून को 50 लाख रुपये एक अन्य इंडसइंड बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए।
कब हुआ ठगी का एहसास?
पीड़ित ने बताया कि 19 जून दोपहर तक ठग उनसे लगातार बात करते रहे और भरोसा दिलाते रहे कि जांच पूरी होते ही पूरी राशि वापस मिल जाएगी। डर के कारण उन्होंने घर में किसी को कुछ नहीं बताया। जब हाल में संपर्क करने की कोशिश की तो आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया, तब जाकर उन्हें ठगी का एहसास हुआ। पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर धनराशि वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साइबर थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गाजियाबाद में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट के मामले
पिछले एक साल में गाजियाबाद और आसपास डिजिटल अरेस्ट के कई बड़े मामले सामने आए हैं। मई 2025 में वैशाली की 55 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका को 28 दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर 56 लाख ठग लिए गए। सितंबर 2025 में 73 वर्षीय पूर्व रक्षा मंत्रालय अधिकारी से 34.9 लाख और गाजियाबाद के एक बुजुर्ग दंपती से करीब 20 लाख की ठगी हुई। वर्ष 2025 में अकेले गाजियाबाद में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में पीड़ितों को कुल 7.9 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा।



