नई दिल्ली: भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने पर्यावरण अनुकूल और साफ-सुथरे रेल परिवहन (Clean Energy Rail Transport) की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रेल मंत्रालय ने हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच भारत की पहली रोज़ाना हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन सेवा (India’s First Hydrogen Powered Train) को आधिकारिक मंज़ूरी दे दी है।
इस कदम के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों (जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका) की लीग में शामिल हो गया है, जो रेल परिवहन में फॉसिल फ्यूल (पारंपरिक ईंधन) के विकल्प के रूप में हाइड्रोजन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्या होगा ट्रेन का नंबर और कहां-कहां रुकेंगी?
मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, देश की यह पहली हाइड्रोजन ट्रेन ट्रेन नंबर 74010/74009 के तौर पर पटरियों पर दौड़ेगी। इस कमर्शियल रूट पर ट्रेन के लिए कुल 12 स्टॉपेज तय किए गए हैं।
हाइड्रोजन ट्रेन के प्रमुख कमर्शियल स्टॉपेज:
जींद सिटी व पांडु पिंडारा
ललित खेड़ा व भंबेवा
ईशापुर खेरी व बुटाना
खंदराई व गोहाना
रभरा व लाठ
मोहना (हरियाणा) व बड़वासनी
75 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार और 10-कार का ट्रेनसेट
मई महीने में इंडियन रेलवे ने नॉर्दर्न रेलवे (Northern Railway) के जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10-कार हाइड्रोजन फ्यूल सेल-बेस्ड ट्रेनसेट को हरी झंडी दी थी। रेल मंत्रालय के मुताबिक, यह ट्रेनसेट अब पटरियों पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ट्रेन की मुख्य तकनीकी खासियतें:
यह ट्रेन 1200 किलोवाट (KW) हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है, जिसकी बदौलत यह 75 किमी प्रति घंटे (kmph) की अधिकतम रफ्तार से दौड़ने में सक्षम होगी।
कैसे काम करती है यह तकनीक और क्यों है यह खास?
पारंपरिक डीजल इंजनों के मुकाबले हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है। रेल मंत्रालय के अनुसार, यह तकनीक हाइड्रोजन का इस्तेमाल करके एक केमिकल रिएक्शन (रासायनिक प्रक्रिया) के ज़रिए बिजली बनाती है। इस पूरी प्रक्रिया में बाई-प्रोडक्ट (उत्पाद) के रूप में सिर्फ पानी की भाप (Water Vapor) बाहर निकलती है, जिससे पर्यावरण को शून्य नुकसान पहुँचता है।
जींद में बना देश का पहला रीफ्यूलिंग स्टेशन, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए हरियाणा के जींद-सोनीपत सेक्शन को एक पायलट रूट के तौर पर चुना गया था। ट्रेन को ईंधन देने के लिए जींद में ही एक स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग फैसिलिटी (ईंधन भरने का केंद्र) का निर्माण किया गया है।
PESO से मिली मंज़ूरी: पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) ने इस साइट पर कम्प्रेस्ड हाइड्रोजन गैस के स्टोरेज और डिस्पेंसिंग के लिए ज़रूरी सुरक्षा लाइसेंस जारी कर दिया है।
बैकअप सिस्टम: रिफ्यूलिंग ऑपरेशन को भरोसेमंद और फेल-सेफ (बिना रुकावट) बनाए रखने के लिए एक टेक्निकल बैकअप और स्टैंडबाय कंप्रेसर यूनिट का भी इंतज़ाम किया गया है।
सेफ्टी सेंसर्स: किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्लांट में ‘हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर’ और ‘फ्लेम डिटेक्टर’ जैसे हाई-टेक सेफ्टी सेंसर लगाए गए हैं, जिनकी नियमित जांच की जाएगी।
दिल्ली और जींद के बीच जून महीने में ही इस हाइड्रोजन ट्रेन का सफ़ल ट्रायल रन (Trial Run) किया गया था, जिसमें इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस और ट्रेन ऑसिलेशन (कंपन) जैसे कड़े मानकों की जांच की गई थी। इस ट्रेन के रखरखाव के लिए शकूरबस्ती (दिल्ली) में विशेष सुरक्षा प्रावधानों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत मेंटेनेंस फैसिलिटी तैयार की गई है।



